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कौशांबी बस अड्डे से अतिक्रमण हटाया जाए

17 अक्तूबर, 2011 को जब 'हिन्दुस्तान' ने आपसे अनुरोध किया था कि 'आओ राजनीति करें' तो हमें मालूम नहीं था कि लोग इस तरह साथ आते जाएंगे और कारवां इतना बड़ा हो जाएगा। उत्तर प्रदेश की जागरुक जनता ने एक पूर्ण बहुमत की सरकार चुनीं और साफ कर दिया कि उसे गठबंधन की बैसाखियों वाली सरकार नहीं चाहिए, उन्हें एक काम करने वाली मजबूत सरकार की दरकार है। तो आइए अब हम 'राजनीति खत्म और काम शुरू' करें। अपने क्षेत्र से जुड़ी समस्याओं और उसको दूर करने के उपाय हमारे साथ साझा करें। लॉग इन करें http://www.livehindustan.com/rkks/letter पर और लिख डालें मुख्यमंत्री के नाम एक पत्र। इस अभियान में हमारे साथ फेसबुक पर भी जुड़ें।

कौशांबी बस अड्डा अतिक्रमण की भेंट चढ़ गया है। बस अड्डे के आसपास कई तरह के अतिक्रमण किए गए हैं। अवैध रूप से खोखे लग रहे हैं तो टेम्पो वाले आड़े-तिरछे टेम्पो खड़े करते हैं। इसके अलावा फुटपाथ पर पटरीवालों ने कब्जा कर रखा है जिससे पीक आवर्स में जाम लगता है। इस वजह से हादसे की आशंका भी बनी रहती है।

कौशांबी डिपो के आसपास अवैध कब्जों की भरमार है। मुख्य गेट पर रेहड़ी वालों ने कब्जा कर रखा है जिससे वाहनों को निकलने में परेशानी होती है। कई बार बसें आधी डिपो के अंदर और आधी बाहर आकर रुक जाती हैं। चूंकि आनंद विहार से मेरठ और उत्तराखंड जाने वाली बसों का रूट यही होता है इसलिए यहां पर ट्रैफिक का दबाव अधिक रहता है।

यहां आटो वालों की मानमानी भी खूब चलती है। किसी भी ऑटो वाले का कोई रूट फिक्स नहीं है। रूट फिक्स न होने से जिस रूट की अधिक सवारी मिल गई, उसी रूट पर चल देते हैं। कई बार टेंपो में बैठी सवारियों को उतार दूसरे रूट पर चल देते हैं। जिससे यात्राियों को परेशानी होती है। वसुंधरा, वैशाली, इंदिरापुरम और कौशांबी में एक भी सरकारी स्कूल नहीं है जिससे पैसे वाले तो अपने बच्चों को पढ़ा लेते हैं लेकिन गरीब लोग अपने बच्चों को नहीं पढ़ा पाते हैं।

मांग
पीक आवर्स में जाम लगने से लोग होते हैं परेशान
क्षेत्र में सरकारी अस्पताल बनाया जाए ताकि सभी को इलाज मिले

समाधान
कौशांबी डिपो के आसपास फैले अतिक्रमण हो हटाया जाए ताकि जाम से लोगों को छुटकारा मिल जाए।
टेंपो और ऑटो के रूट निर्धारित किए जाएं। इसके अलावा किराया भी फिक्स किया जाए

38 रोडवेज बसों का कौशांबी बस अड्डे से संचालन होता है
12 सौ के करीब ऑटो का संचलान होता है इलाके में
79 बसें अनुबंधित हैं कौशांबी बस अड्डे में
02 हजार से अधिक टेंपो चलते हैं इस इलाके में
सरकारी स्कूल का निर्माण हो, ताकि सभी को शिक्षा मिल सके

वैशाली निवासी विलेशचंद दिल्ली के कलावती सरन अस्पताल में लैब टेक्निशियन के पद पर कार्यरत हैं। विलेशचंद की पढ़ाई-लिखाई दिल्ली में हुई है। उन्होंने 1986 में मोती नगर स्थित सरकारी स्कूल से हायर सेकेंडरी पास की। उसी दौरान उनकी नौकरी अस्पताल में लग गई। विलेश करीब 16 साल  से वैशाली में रह रहे हैं। विलेश के दो बेटे और एक बेटी हैं। एक बेटा जॉब कर रहा था जबकि एक बेटा और बेटी पढ़ाई कर रहे हैं।

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