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झूठ बोलने से डरते हैं आमिर

आमिर खान कुछ भी करते हैं तो एक बड़ी चर्चा छिड़ जाती है। फिलहाल, वह किसी फिल्म के लिए नहीं बल्कि टीवी पर अपने नए अवतार को लेकर यानी कि अपने नए शो ‘सत्यमेव जयते’ को लेकर चर्चा में हैं। पिछले साल एक कम बजट की फिल्म धोबी घाट और एक बोल्ड फिल्म डेल्ही बेल्ही के निर्माण के बाद इस साल ये उनका पहला धमाका होगा। आंखें तो उनकी आगामी फिल्म तलाश पर भी लगी रहेंगी, जिसके बारे में कहा जा रहा है कि इसकी रिलीज इस शो की वजह से ही आगे खिसकाई गयी है। आमिर का दावा है कि ये शो टीवी के अन्य शोज से बेहद अलग है। आखिर क्यों? आइये जानें आमिर के शब्दों में।

इस शो की योजना कैसे बनी?
पिछले कुछ वर्षों में मुझे कई टेलीविजन कार्यक्रमों से जुड़ने के ऑफर मिल रहे थे। यह गेम शो व रियलिटी शो वगैरह थे। पर इनमें से किसी भी कार्यक्रम में मुझे उत्साहित या रोमांचित नहीं किया। चार साल पहले जब उदयशंकर (स्टार इंडिया के सीईओ) मुझसे मिले और उन्होंने मुझसे कहा कि मुझे टीवी से जुड़ना चाहिए, तो मैंने कहा कि मैं कुछ सोचता हूं। मैंने उस दिन उनसे कहा था कि जब मेरे दिमाग में किसी ऐसे कार्यक्रम का आइडिया आएगा जो कि मुझे रोमांचित करेगा, तो वह आगे बढ़ेंगे। मैं रोमांचित होने पर ही काम करता हूं। सच कहूं तो कई साल पहले मेरे दिमाग में इसकी शुरुआत एक सपने की तरह हुई थी। पिछले दो साल से मेरी जिंदगी सिर्फ इसी कार्यक्रम के इर्द-गिर्द घूम रही है। यह बहुत ही ज्यादा जटिल कार्यक्रम है। इसे करते हुए मैंने भी बहुत कुछ सीखा। अब लोग इसे देखते हुए सीखेंगे। इस कार्यक्रम के प्रसारण के बाद बहुत कुछ बदलेगा।

आखिर ‘सत्यमेव जयते’ क्या है?
यह मेरी जिंदगी का बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह मेरी जिंदगी का अहम पड़ाव है। मैंने अब तक कई बेहतरीन व महत्वपूर्ण फिल्में की हैं, पर यदि मुझे यह कहना हो कि मेरे दिल के करीब क्या है, तो मैं यही कहूंगा कि यह टीवी शो मेरे दिल के करीब है। यह मेरी अहम यात्रा है।

लेकिन इस टीवी शो में होगा क्या?
मैं इस शो को लेकर ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहता हूं। मैं चाहता हूं कि लोग इस शो को 6 मई से हर रविवार सुबह ग्यारह बजे देखें और इंज्वॉय करें। यह शो आम भारतीयों से मिलने, भारत तथा आम भारतीयों से जुड़ने की बात करता है। आप इसे ‘भारत जोड़ो अभियान’ कह सकते हैं।

इस शो के बारे में कुछ तो बताएं?
ठीक है, पर बहुत कम बता सकता हूं। यह वह शो है जिसमें मैं लोगों से जुड़ता हूं। जो चीजें हिंदुस्तानी (अमीर, गरीब, शहरी, गांववासी, नर, नारी, युवा, बच्चा, बुजुर्ग) की जिंदगी से सरोकार रखती हैं। उन्हीं पर यह शो है। इस शो के माध्यम से कोशिश की गई है कि हम अपने आपको समझों। उन चीजों पर गौर करें जिनसे हमें दुख होता है। हम कैसे खुद को बदलकर बेहतर जिंदगी की तरफ आगे बढ़ सकते हैं, इसकी बात की गई है। यह सोच-विचार वाला शो है।

हर एपीसोड में गीत रखने के पीछे आपकी सोच क्या है?
मैं इस शो को लोगों के दिलों से जोड़ना चाहता हूं-इस शो के जरिए मैं लोगों के दिल तक पहुंचना चाहता हूं। हम गीत व संगीत के माध्यम से आसानी से लोगों के दिलों को टटोल सकते हैं, जो कि आपसी बातचीत से संभव नहीं हो सकता।

आप इस शो को रजिस्टर्ड करना चाहते थे? 
‘सत्यमेव जयते’ यही हमारे देश का मोटो है। हम इस शो के जरिए सच की खोज कर रहे हैं। इसे हम कॉपीराइट के तहत रजिस्टर्ड नहीं करा सके। क्योंकि हमें पता चला कि यह हर हिंदुस्तानी का है तो मुझे भी लगा कि सच है। मुझे अकेले इस पर हक नहीं जताना चाहिए।

इस शो को बनाने के आपके अनुभव क्या रहे?
मेरा अनुभव कमाल का रहा। मेरे लिए यह सीखने का बेहतर अवसर रहा। देशभर में हर प्रांत में घूमा। हर प्रांत के हर वर्ग, जाति, धर्म, पुरुष, नारी, हर उम्र के लोगों, हर किसी से मिला। मैं खुद को भाग्यशाली मानता हूं। यदि मैं यह टीवी कार्यक्रम न करता तो यह अवसर न मिल पाता। लोगों से मिलने पर मैं  कई बार रोया। कई बार हंसा। दिल को कुछ चीजें तकलीफ देती हैं। पर मुझे तमाम प्रेरणादायक लोगों से मिलने का मौका मिला।

आप पूरे देश के अनगिनत लोगों से मिले। आपको रोना भी आया तो उन्हें बदलने के लिए आपने क्या किया?
मैं खुद को इतना सक्षम नहीं मानता कि मैं किसी की जिंदगी बदल दूं। मैंने लोगों की परेशानी समझने, संवेदना प्रकट करने व उनसे जुड़ने की कोशिश की है। मैं यह दावा नहीं करता कि मैं कोई क्रांति लाने जा रहा हूं।

कहीं आपने खुद को भी बदलने की जरूरत महसूस की?
मैं अपने अंदर की कई चीजें बदल रहा हूं। पहले मैं जल्दी टूट जाता था और फिर अपने आपको अपने अंदर ही बंद कर लेता था। बहुत जल्द निर्णय ले लेता था कि कौन गलत है। पर अब मुझे यह बचपना लगा। किसी से आपका नजरिया नहीं मिलता, तो उससे अपने आपको काट लेना गलत है। यह बात समझ में आ गई। रिश्ते बड़ी मुश्किल से जुड़ते हैं। उन्हें तोड़ने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।

आप सत्य की खोज कर रहे हैं। पर आप कब झूठ बोलते हैं?
पहली बात तो मैं बहुत कम झूठ बोलता हूं और जब भी झूठ बोलता हूं, अंदर से मुझे बड़ी तकलीफ होती है। खुद को गिरा हुआ महसूस करता हूं। खुद को बहुत छोटा महसूस करता हूं। आखिरकार सच ही बेहतर होता है।

क्या आपके इस शो से कोई राज्य छूट गया है?
नहीं! मैं जिन राज्यों में नहीं पहुंच पाया, वहां के लोग खुद मेरे पास आए और मुझसे मिले। पर ज्यादा से ज्यादा राज्यों में मैं गया हूं।

लीक से हटकर शो बनाते हुए आपको डर भी लग रहा होगा?
मैं अपनी जिंदगी में अलग रास्ते पर ही चलता रहा हूं। मगर मुझे हमेशा यह पता होता था कि मैं जो कर रहा हूं उसके लिए नया रास्ता तो खोजना ही पड़ेगा। लेकिन मैं मनोरंजनकर्ता हूं। पर मेरा मकसद सिर्फ लोगों को हंसाना नहीं है।
 
आपने रविवार की सुबह ग्यारह बजे का ही समय क्यों चुना?
रविवार की सुबह ग्यारह बजे का समय मैंने खुद चुना है। क्योंकि मैं तो ‘महाभारत’ व ‘रामायण’ का पैशिनेट हूं। जब ये कार्यक्रम रविवार की सुबह प्रसारित होते थे तो पूरे देश की सड़कें सूनी हो जाती थीं। हम भी यही चाहते हैं।
 
टीआरपी को लेकर आप क्या सोच रहे हैं?
मुझे टीआरपी का फंडा पता नहीं। मैं चाहता हूं कि इस कार्यक्रम को ज्यादा से ज्यादा दर्शक देखें। इसलिए इसमें मैंने मसाला नहीं डाला।

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