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जब जिया को मिली थी शिमला में सजा!

अपने रवैये के चलते तानाशाह के नाम से मशहूर और लोगों में भय पैदा कर देने वाले पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति जिया-उल हक एक समय दंड के भागी बने थे। यह वाक्या उस समय का है जब वह शिमला में एक स्कूल में पढ़ते थे।

जिया को यह दंड वर्ष 1939 में लालपानी स्थित गवर्नमेंट ब्वॉयज सीनियर सेकेंडरी स्कूल से नदारद होने पर मिला था। स्कूल प्रशासन ने उन पर दो आना जुर्माना लगाया था।

स्कूल के प्रधानाचार्य आर.सी. रंगड़ा ने बताया कि 3 अप्रैल 1939 को स्कूल से नदारद रहने पर जिया पर जुर्माना लगाया गया था। जिया उस समय कक्षा 10वीं बी में थे।

प्रधानाचार्य ने बताया कि जिया ने यह जुर्माना भरा था या नहीं, इस बात का रिकॉर्ड नहीं हैं। यहां तक कि उनके कक्षा अध्यापक ने उपस्थिति पंजिका में इस सम्बंध में कोई प्रविष्टि नहीं की है।

उन्होंने कहा कि उपस्थिति पंजिका में जुर्माने की तालिका में केवल सही का निशान है। स्कूल की उपस्थिति पंजिका के मुताबिक जिया की प्रवेश संख्या 2442 थी और जब वह 10वीं कक्षा में थे तो उनका रोल नम्बर 33 था। कक्षा में उस समय 38 छात्र थे।

प्रधानाचार्य ने बताया कि स्कूल में उस समय कक्षा 10 तक पढ़ाई होती थी। इससे जाहिर होता है कि जिया ने इस स्कूल की अंतिम कक्षा को उत्तीर्ण किया था।

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