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सीरिया संकट: अब तक 8 हजार मौतें

सीरिया में पिछले 12 वर्षों से सत्ता पर काबिज राष्ट्रपति बशर अल-असद के खिलाफ पिछले एक साल से जारी विरोध प्रदर्शनों में अब तक 8000 लोगों की मौत हो चुकी है। अरब के देशों ट्यूनीशिया और मिस्र में प्रदर्शनों के जरिए राष्ट्र प्रमुखों को सत्ता से बेदखल किए जाने के बाद सीरिया में मार्च 2011 में इस तरह के प्रदर्शनों की शुरुआत हुई थी।

बशर ने वर्ष 2000 में अपने पिता हाफिज की मौत के बाद सीरिया की सत्ता संभाली थी और शुरुआत में उन्होंने अपने को सुधारवादी के रूप में पेश किया। उन्होंने कई उदारवादी फैसले किए जिसके तहत हजारों राजनीतिक कैदी रिहा किए गए, विपक्षी सदस्यों को खुलेआम बोलने की आजादी दी गई और मीडिया को भी सीमित आजादी दी गई।

यह शांति प्रक्रिया हालांकि, बहुत दिनों नहीं चली और सुधारों की प्रक्रिया जल्दी ही धीमी पड़ गई। इसके बाद जब मार्च 2011 में सत्ता विरोधी प्रदर्शन शुरू हुए तो उन्हें बेरहमी से कुचलने के निर्देश दिए गए और तब से यह सिलसिला अब तक जारी है।

राजनीतिक संकट के समाधान के लिए वैश्विक स्तर पर पहल की गई, अरब लीग ने दखल दिया लेकिन अब तक इसके नतीजे सिफर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के मुताबिक अब तक विरोध प्रदर्शनों में 7500 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह आंकड़ा 8000 से अधिक है।

संकट का राजनीतिक समाधान निकालने की दिशा में सयुंक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिव कोफी अन्नान शनिवार को राष्ट्रपति बशर अल-असद से मिले लेकिन असद ने साफ कर दिया कि जब तक विद्रोही गुट हिंसा नहीं छोड़ते बातचीत नहीं हो सकती। हालांकि, उन्होंने शांति प्रक्रिया का समर्थन किया और दोनों तरफ से संघर्ष विराम को स्वीकार का संकेत दिया है।

एक तरफ जहां बशर अन्नान से बात कर रहे थे वहीं, सेना ने विपक्ष के लड़ाकों को निशाना बनाते हुए देश के उत्तरी शहर इदलिब पर भीषण हमले किए। इदलिब में एक मानवाधिकार कार्यकर्ता ने बताया कि शहर में हमले शनिवार तड़के शुरू हुए। शहर पर चारों तरफ से रुक-रुक कर टैंकों और मोर्टारों से हमले किए गए।

सीरिया के 'ऑब्जरवेटरी फार ह्यूमन राइट्स' ने बताया कि सेना ने शनिवार को इदलिब में घात लगाकर विपक्ष के 16 लड़ाकों की हत्या कर दी जबकि लड़ाकों ने चार सैनिकों को मारा और पांच को बंधक बनाया। वहीं, लंदन स्थित मानवाधिकार संगठन ने बताया कि हिंसा में 31 लोग मारे गए।

अन्नान के दमिश्क पहुंचने के कुछ घंटे बाद ही इदलिब में हिंसा शुरू हुई। सेना की ओर से शहर पर घंटों बमबारी की गई।  अन्नान की इस यात्रा को सीरिया संकट के राजनीतिक समाधान की दिशा में देखा जा रहा है।

अन्नान की यात्रा से पहले सीरियाई राष्ट्रीय परिषद (एनएनसी) के अध्यक्ष बुरहान घालिउन ने शुक्रवार को कहा कि उनकी यात्रा से केवल समय नष्ट होगा। संकट का समाधान असद सरकार पर सैन्य दबाव से ही हो सकता है, जबकि अन्नान ने कहा है कि ताकत के इस्तेमाल से सीरियाई संकट और गहराएगा।

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