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इस तिमाही में बड़ी कंपनियों से उम्मीद नहीं: रिजर्व बैंक

कम मांग तथा कार्यशील पूंजी की कमी का सामना कर रही बड़ी कंपनियां जनवरी-मार्च के दौरान अपने वित्तीय प्रदर्शन में सुधार को लेकर आशान्वित नहीं हैं। भारतीय रिजर्व बैंक की रिपोर्ट में यह बात कही गयी है।

रिपोर्ट के अनुसार, कंपनियों के समक्ष सबसे बड़ी समस्या घरेलू मांग की कमी तथा बिजली एवं कार्यशील पूंजी की कमी है, हालांकि 1,000 करोड़ रुपए या इससे अधिक मूल्य का सालाना उत्पादन करने वाली बड़ी कंपनियां जनवरी-मार्च के दौरान मांग में वृद्धि को लेकर आशान्वित हैं, लेकिन उन्हें अपनी वित्तीय स्थिति को लेकर उन्हें बहुत ज्यादा उम्मीद नहीं है।

अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में करीब 50 प्रतिशत कंपनियों के समक्ष सामान्य उत्पादन स्तर प्राप्त करने में बाधा उत्पन्न हुई। रिपोर्ट में कहा गया है कि बड़े औद्योगिक समूह कच्चे माल की लागत को लेकर ज्यादा आशान्वित हैं लेकिन अपने लाभ मार्जिन को लेकर उन्हें कम उम्मीद है।

रिपोर्ट के मुताबिक कच्चे माल की लागत में जनवरी-मार्च के दौरान और वृद्धि की आशंका है।
आर्थिक वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) में 6.1 प्रतिशत रही जो दो साल में सबसे कम है। मुख्य रूप से विनिर्माण क्षेत्र में खराब प्रदर्शन के कारण आर्थिक वृद्धि तीसरी तिमाही में धीमी रही है।

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