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काजीरंगा में उद्योग, न्यायाधिकरण ने मांगी रिपोर्ट

राष्ट्रीय हरित न्यायाधीकरण ने पर्यावरण एवं वन मंत्रालय से असम स्थित काजीरंगा राष्ट्रीय अभ्यारण के आस-पास संचालित औद्योगिक इकाइयों से संबंधित रपट मांगी है।

न्यायाधिकरण ने मंत्रालय से असम स्थित अभ्यारण के आस-पास वाले वर्जित विकास क्षेत्र (नो डेवलपमेंट जोन), टाइगर रिजर्व और कार्बी-आंगलोंग एलीफैंट रिजर्व क्षेत्र में अवैध एवं अनियतिम खनन गतिविधियां रोकने की याचिका पर कार्रवाई नहीं होने पर दुख व्यक्त करते हुये अभ्यारण क्षेत्र में चलने वाली इकाईयों के सर्वेक्षण संबंधी रपट की मांग की है।

न्यायाधिकरण ने कहा है कि हमें दुख है कि कई मौके मिलने के बाद भी पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने मामले की अनदेखी की। यदि मंत्रालय 23 मई तक इसका जवाब नहीं देता है, तो सुनवाई की तिथि और आगे बढ़ा दी जाएगी और हम इसके आगे जाकर मामले के महत्व के अनुरूप फैसला करेंगे। 

न्यायाधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति ए सूर्यनारायण नायडू एवं सदस्य जीके पाण्डेय ने कहा, इस बीच मंत्रालय को अपने जिम्मेदार अधिकारियों के जरिए स्थल का निरीक्षण करवाना चाहिए और नो डेवलेपमेंट जोन के कुल क्षेत्र के बारे में रिपोर्ट सौंपनी चाहिए।

यह याचिका असम निवासी रोहित चौधरी के वकील राहुल चौधरी की ओर से दायर की गयी थी। इस याचिका में सरकार से काजीरंगा राष्ट्रीय अभ्यारण के आस-पास वाले क्षेत्र में पत्थर तोड़ने एवं खनन गतिविधियों वाली इकाईयों पर रोक लगाने की मांग की गयी थी। काजीरंगा अभ्यारण में सौ से ज्यादा गैंडे हैं।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ऋत्विक दत्ता ने नो डेवलपमेंट जोन में संचालित ईंट बनाने वाली एवं खनन इकाईयों और चाय कारखानों की जानकारी दी थी। इसके अलावा इस क्षेत्र में नुमालीगढ़ रिलाइनरी भी चल रही है।

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