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देश के 80 फीसदी स्कूली छात्र प्रताड़ित

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) की ओर से कराए गए एक सर्वेक्षण में कहा गया है कि देश भर के स्कूलों के 80 फीसदी से अधिक छात्रों को प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है।  

आयोग की ओर से 2009-10 के दौरान सात राज्यों में सर्वेक्षण कराया गया। इस सर्वेक्षण में 6,632 छात्रों में से सिर्फ नौ ने इस बात से इंकार किया कि उन्हें स्कूलों में किसी तरह के दंड का सामना करना पड़ा।

बाल आयोग का कहना है कि बच्चों को शारीरिक दंड के साथ मानसिक और भेदभाव का सामना करना पड़ता है, जिससे वे शारीरिक एवं मानसिक तौर पर परेशान होते हैं। सर्वेक्षण का मकसद यह पता करना था कि स्कूल में हर दिन बच्चों को किसी तरह के शारीरिक दंड का सामना करना पड़ता है।

इसमें कहा गया है, 99.86 बच्चों ने कहा कि उन्हें किसी न किसी तरह के दंड का सामना करना पड़ा है। 81.2 फीसदी बच्चों ने कहा कि उन्हें कहा गया कि वे पढ़ने लिखने की क्षमता नहीं रखते। यही नहीं, कई बार बच्चों को थप्पड़ और डंडे से पिटाई और अन्य तरह के दंड का सामना करना पड़ता है।

आयोग के एक अधिकारी का कहना है कि स्कूलों में शारीरिक दंड को खत्म करने के लिए दिशा-निर्देश सोमवार को जारी किए जाएंगे।

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