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पाक आयोग के जल्द भारत आने की उम्मीद नहीं

पाकिस्तान में मुंबई पर 26 नवंबर को हुए हमले से जुड़े मामले में अदालती कार्यवाही में लंबे विलंब से निराश भारत को उम्मीद नहीं है कि पाकिस्तानी गृह मंत्री रहमान मलिक की ओर से घोषणा किए जाने के बावजूद उस देश का न्यायिक आयोग इस मामले की जांच से जुड़े महत्वपूर्ण लोगों का बयान दर्ज करने के लिए जल्द इस देश की यात्रा पर आएगा।

मलिक द्वारा हाल में की गई उस घोषणा को लेकर गृह मंत्रालय के अधिकारियों में संशय है जिसमें कहा गया था कि पाकिस्तानी न्यायिक आयोग 12 मार्च को भारत जाएगा। इस संशय की वजह यह है कि विगत में इस तरह की घोषणा करने के बावजूद आयोग भारत नहीं आया है।

पाकिस्तान विगत दो वर्षों से कहता रहा है कि 26 नवंबर के हमले से संबंधित मामले में न्यायिक प्रक्रिया को उसके तार्किक अंजाम तक ले जाने के लिए भारत में मामले के जांच अधिकारी रमेश महाले, इस मामले में पकड़े गए एकमात्र जिंदा आतंकवादी अजमल आमिर कसाब का इकबालिया बयान दर्ज करने वाले मजिस्ट्रेट का बयान लेने के लिए आयोग का भारत जाना जरूरी है।

एक अधिकारी ने कहा कि कई बार तारीखों की घोषणा करने के बावजूद वे किसी न किसी कारण का हवाला देकर भारत आने में विफल रहे हैं। पिछली बार उन्होंने फरवरी के पहले हफ्ते में होने वाली अपनी पूर्व निर्धारित यात्रा रद्द कर दी थी। हमें नहीं लगता कि पाकिस्तानी आयोग जल्द आने जा रहा है।

भारत-पाकिस्तान के गृह सचिवों की गत 29 मार्च 2011 को वार्ता के बाद जारी संयुक्त वक्तव्य में कहा गया था कि चार हफ्ते के भीतर पाकिस्तान से न्यायिक आयोग की यात्रा की तारीख की सूचना भारत को दे दी जाएगी। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।

आयोग को भारत भेजने में पाकिस्तान की अक्षमता ने उसकी मंशा पर सवाल खड़े कर दिए हैं और रावलपिंडी की अदालत में सात संदिग्धों के खिलाफ मुंबई हमले के सिलसिले में चलाए जा रहे मुकदमे के लिए अनिश्चितता पैदा हो गई है। इन सात संदिग्धों में लश्कर-ए-तैयबा का कमांडर जकीउर रहमान लखवी भी शामिल है।

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