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छवि धूमिल करने को काफी राशि खर्च की गई: सेनाध्यक्ष

सेनाध्यक्ष जनरल वी.के. सिंह ने आरोप लगाया है कि फर्जी जन्म प्रमाणपत्र प्राप्त करने तथा उनकी छवि धूमिल करने के लिए बल के भीतर के लोगों की ओर से काफी राशि खर्च की गई क्योंकि उन्होंने उनके गलत कार्यों पर रोक लगा दी थी। सेनाध्यक्ष जनरल सिंह की जन्मतिथि को लेकर काफी विवाद हुआ था।

जनरल सिंह ने कहा कि उनके पास इस बात के सबूत हैं कि उनके खिलाफ अपमानजनक और पूरी तरह से झूठी खबरों के पीछे सेना के भीतर के लोगों का हाथ था और उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि कई लोग मेरी छवि को धूमिल करने के पीछे लगे हुए थे क्योंकि वे मेरी ओर से गलत कार्यों के खिलाफ शुरू की गई कार्रवाई से खुश नहीं थे। आपको यह जानकार आश्चर्य होगा कि मेरी फर्जी जन्मतिथि प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए कितनी राशि खर्च की गई।

यह पूछे जाने पर कि उन्हें बदनाम करने के लिए राशि कौन खर्च कर रहा था, उन्होंने कहा कि इसमें काफी लोग शामिल थे। कई लोगों को मेरे खिलाफ खबरें करने के लिए काफी राशि मुहैया करायी गई। ये खबरें अपमानजनक और पूरी तरह से फर्जी थीं।

यह कहे जाने पर कि एक अवकाशप्राप्त लेफ्टिनेंट जनरल पर पहले ही उनके खिलाफ साजिश रचने के आरोप लगाये गए हैं, उन्होंने कहा कि वह अकेले नहीं थे। हमने ऐसे कई लोगों की पहचान की है। उन्होंने कहा कि हमारे पास इस बात के सबूत हैं कि दस्तावेज कैसे लीक किये गए और राशि कैसे दी गई तथा यह कि वे सेना के भीतर के थे।

यह पूछे जाने पर कि क्या उन्हें इस बात का लेकर आश्चर्य हुआ कि वर्तमान में कार्यरत अधिकारी उनके खिलाफ कार्य कर रहे हैं, सेनाध्यक्ष ने कहा कि हमारे जैसे बड़े संगठन में आपको ऐसे व्यक्ति मिलेंगे जो यह महसूस करते हैं कि उन्हें छोड़ दिया गया है। ऐसे लोग थे जो गलत कार्य में लिप्त थे लेकिन जब हमने उन पर रोक लगायी तो वे मेरे खिलाफ हो गए।

जनरल सिंह ने कहा कि हमारे पास सबूत हैं और आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। यदि किसी ने सेना के साथ विश्वासघात किया है तो उसे सजा मिलेगी। यह सेना का नियम है।

जनरल सिंह अपनी जन्मतिथि को लेकर काफी विवादों में फंसे थे। सेना की दो शाखाओं एडुजेंट जनरल शाखा और सैन्य सचिव शाखा के पास उनकी जन्म को लेकर अलग-अलग तिथियां थीं। एक तिथि 10 मई 1951 और दूसरी 10 मई 1950 थी।

उन्होंने हमेशा ही कहा कि उनकी वास्तविक जन्मतिथि 1951 है। इससे उन्हें इस वर्ष मई महीने के अंत से नौ महीने अतिरिक्त सेवा विस्तार मिलता। उन्होंने इस मुद्दे पर सरकार को सुप्रीम कोर्ट में खींचा। लेकिन वह न्यायालय में कानूनी लड़ाई हार गए और उन्हें अब मई में ही अवकाशग्रहण करना होगा।

रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी के साथ संबंधों के बारे में पूछे जाने पर सेनाध्यक्ष ने कहा कि उनका व्यवहार मेरे साथ हमेशा ही अच्छा रहा और हम दोनों के बीच एक भी मतभेद नहीं रहा। उन्होंने कहा कि मैं उनसे खरा था और वह हमेशा ही इसकी प्रशंसा करते थे। यह पूछे जाने पर कि क्या चोरी छुपे बात सुनने के विवाद के बावजूद संबंध अच्छे थे, उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसी कोई बात नहीं थी।

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