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भारतीय एनजीओ चिंतन को अमेरिकी अवार्ड

भारत के एक गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) ‘चिंतन’ को पहले अमेरिकी ‘इनोवेशन अवार्ड’ के लिए चुना गया है। इसे यह पुरस्कार महिलाओं तथा लड़कियों के सशक्तीकरण और कूड़ा बीनने वाले क्षेत्र से बाल श्रम समाप्त करने के लिए दिया गया है।

‘चिंतन’ को पहला अमेरिकी ‘इनोवेशन अवार्ड’ देने की घोषणा शुक्रवार को अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने की। यह अवार्ड रॉकफेलर फाउंडेशन की ओर से दिया जाता है। पुरस्कार स्वरूप पांच लाख डॉलर की राशि दी जाती है।

अवार्ड की घोषणा करते हुए हिलेरी ने कहा कि भारतीय गैर-सरकारी संगठन चिंतन कूड़ा बीनने वालों को प्रशिक्षित एवं संगठित करने तथा इस क्षेत्र से बाल मजदूरी समाप्त करने के लिए काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस नए विचार को पहचाने तथा समर्थन देने की जरूरत है, जो दुनियाभर में महिलाओं तथा लड़कियों के जीवन को बदल रहा है।

उनके अनुसार, चिंतन ने भारत में पिछले पांच वर्षो में 20,000 कूड़ा बीनने वालों के लिए काम किया। दो हजार से अधिक बच्चों को इस क्षेत्र से बाहर किया गया और उन्हें शिक्षा तथा अन्य अवसर मुहैया कराए गए।

चिंतन की संस्थापक भारती चतुर्वेदी ने कहा कि उनका संगठन हरित क्षेत्र में लोगों को नौकरियां देता है। उन्होंने कहा कि इस पुरस्कार से मिलने वाली राशि का इस्तेमाल युवतियों को स्कूल भेजने और कूड़ा बीनने वाली अधिक से अधिक महिलाओं को हरित क्षेत्र में नौकरियां देने में किया जाएगा।

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