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विश्वसनीय कार्ययोजना बनाए जी-20: भारत

भारत ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को सुधार के रास्ते पर लाने के लिए दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले 20 देशों के समूह जी-20 से विश्वसनीय और महत्वाकांक्षी कार्ययोजना बनाने के साथ मजबूत, टिकाऊ और संतुलित विकास को बढ़ावा देने को कहा है।

जी-20 देशों के वित्त मंत्रियों की एक बैठक में भारत के वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा कि प्रस्तावित कार्ययोजना को जून में मेक्सिको के ला काबोस में होने वाली बैठक में समूह के देशों द्वारा स्वीकार किया जाना चाहिए। इसमें उपरोक्त तीनों चीजों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि इससे प्रतिबद्धताओं, नौकरियों और रोजगार के मसले पर जी-2० देशों की प्रतिबद्धताओं के मूल्यांकन के लिए एक फ्रेमवर्क बनने के साथ आधारभूत संरचना क्षेत्र सहित रियल सेक्टर में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए उठाया जा सकेगा।

विश्व बैंक-अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की वार्षिक वसंत बैठक में 'ग्लोबल इकोनॉमी एंड फ्रेमवर्क' पर मुखर्जी ने कहा, ''इस तरह वैश्विक विकास में सुधार के लिए जितना ध्यान दिया जाना चाहिए उतना नहीं दिया जा रहा है।'' उन्होंने कहा, ''विकासशील देशों में इस तरह के निवेश को बढ़ावा देने से वैश्विक स्तर पर मांग को पुर्नसतुलित करने में सहायता मिलेगी और साथ ही बचत को बढ़ावा मिलेगा।''

उन्होंने कहा कि पिछले साल दुनिया ने आर्थिक और राजनीतिक उथल-पुथल देखी है लेकिन आने वाले समय को लेकर आंकड़ें बहुत अच्छी तस्वीर नहीं पेश कर रहे हैं, आर्थिक स्थिति कुल मिलाकर कमजोर बनी हुई है और बेरोजगारी की दर राजनीतिक रूप से अस्वीकार्य स्तर पर है।

विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं से वैश्विक अर्थव्यवस्था में विकास की गति बनाए रखने की अपेक्षा की जा रही है यद्यपि सच्चाई यह है कि वहां भी विकास की दर में कमी आ रही है। 

उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था आज एक दूसरे जुड़ी हुई है और अग्रणी अर्थव्यवस्था में घटने वाली घटनाओं का उसर उनपर भी पड़ता है। जहां तक भारत का सवाल है तो बाहरी वातावरण में बेहत प्रतिकूल स्थिति होने के बावजूद हम मानते हैं कि अर्थव्यवस्था की हमारी जड़े मजबूत है।

वित्त मंत्री ने कहा, ''हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि राजकोषीय समेकन की प्रक्रिया गति पकड़ चुकी है साथ ही मौद्रिक नीति महंगाई के दबाव से निपटने के लिए नजर रख रही है।'' मुखर्जी ने कहा कि वह आशा करते हैं कि वर्ष 2011-12 में देश की वास्तविक विकास दर सात फीसदी रहेगी।

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