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आई पैड की कहानी उसी की जुबानी

मेरा जन्म हुआ और उसके साथ ही पूरी दुनिया मेरी दीवानी हो गई। दुनिया ने मुझे सबसे पहले 2001 में देखा और उसके बाद मैं सबसे लोकप्रिय म्यूजिक प्लेयर बन गया। और ऐसा होता भी क्यों नहीं, मेरा निर्माता एप्पल, मुझ जैसी अनोखी चीजों को बनाने के लिए ही तो जाना जाता है। समय के साथ मेरा रूप भी बदला। मैं साल-दर-साल और ज्यादा बेहतर बन गया हूं। मुझमें बेहतर सुविधाएं शामिल हो गई हैं। और हां! तुम मेरे अंदर पहले की तुलना में कहीं ज्यादा गाने स्टोर कर सकते हो।

2002 से मेरे अंदर काफी सारे बदलाव आए हैं। 2002 में एप्पल ने सेकेंड जेनरेशन आई पॉड लॉन्च किया और इसमें मेकेनिकल स्क्रॉल व्हील की जगह टच सेंसिटिव स्क्रॉल व्हील और 10 से 20 जीबी की मेमोरी थी। यानी, तुम इस सेकेंड जेनरेशन आई पॉड में पहले की तुलना में कहीं ज्यादा गाने स्टोर कर सकते थे। पर मेरे ब्लैक एंड व्हाइट डिसप्ले को नहीं बदला गया। वर्ष 2004 में एप्पल ने थर्ड जेनरेशन आई पॉड लॉन्च किया और वह भी 40 जीबी मेमोरी के साथ। 2004 के मेरे नए रूप की एक और खासियत थी, अब बटन को स्क्रीन के ठीक नीचे रखा गया था। इससे मेरा लुक बिल्कुल बदल गया। इसी साल एप्पल ने 75 प्रतिशत मार्केट शेयर पर कब्जा कर लिया और एक बार फिर मेरा लुक बदला। स्क्रीन के साथ बने कंट्रोल बटन में कुछ बदलाव तो किया ही गया, साथ ही 20 जीबी और 40 जीबी वाले दो तरह के आई पॉड लॉन्च किए गए।

इसमें यूएसबी को री-चार्ज करने का तो विकल्प था ही, इसके साथ बैट्री की लाइफ भी 12 घंटे की थी। मेरी जिंदगी की एक और खासियत है। सबसे पहले कलर स्क्रीन वाले आई पॉड के रूप में मैं ही मार्केट में आया। 2005 में मेरा नेक्स्ट जेनरेशन भी मार्केट में आ गया और वह भी कई और खूबियों के साथ। इसमें वीडियो प्लेबैक की सुविधा थी। वीडियो और तस्वीरें रखने के लिए 80 जीबी का स्पेस था और साथ ही मेरी स्क्रीन भी पहले से काफी चौड़ी हो गई थी।

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