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उत्पाद व सेवा कर से वांछित परिणाम मिलना मुश्किल

उद्योग जगत ने रविवार को वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी से कहा कि उत्पाद शुल्क और सेवा कर दरों में वृद्धि से उद्योगों की उत्पादन लागत बढ़ेगी जिसके परिणामस्वरूप महंगाई बढ़ेगी। ऐसे में वांछित परिणाम मिलना मुश्किल होगा। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी के साथ आज यहां तीनों वाणिज्य एवं उद्योग मंडल के अध्यक्ष तथा उनके प्रतिनिधियों की साक्षा बैठक में यह विचार सामने आये।

उद्योग मंडल सीआईआई के अध्यक्ष बी मुथुरमन ने कहा कि उत्पाद शुल्क तथा सेवा कर की दरों में वृद्धि करने के लिये यह उचित समय नहीं था। उन्होंने इसपर निराश व्यक्त करते हुये कहा इससे न केवल मंद पड़ रही मुद्रास्फीति में तेजी आएगी बल्कि कच्चे माल की लागत बढ़ने से उद्योग पर भी दबाव बढ़ेगा।

टाटा स्टील के उपाध्यक्ष मुथुरमन ने कहा कि शुल्क में वृद्धि से वांछित राजस्व प्राप्ति की संभावना भी कम है बल्कि इसके उलट इससे आर्थिक वृद्धि नरम होगी और मुद्रास्फीति दबाव बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री राजकोषीय स्थिति में सुधार के लिये बुरी तरह खस्ताहाली में पहुंच चुके सार्वजनिक उपक्रमों के पास पड़ी भूमि और दूसरी परिसंपत्तियों का आकलन कर सकते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का करीब तीन लाख करोड़ रुपये विभिन्न कर विवादों में फंसा हुआ है। सरकार को इसके लिये न्यायालय से बाहर समझौते कर राजस्व वसूली बढ़ानी चाहिये। मुखर्जी ने 2012-13 के बजट में उत्पाद शुल्क तथा सेवा कर की दर को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत कर दिया। इससे सरकार को 45,940 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिलने की संभावना है। इसके साथ ही सेवाकर का दायरा भी व्यापक बना दिया गया है।

फिक्की अध्यक्ष रवि कनोड़िया ने कहा कि प्रत्यक्ष कर में मामूली राहत से उत्पाद शुल्क एवं सेवा कर की दरों में वृद्धि का असर दूर नहीं होगा। उन्होंने कहा कि इससे मुद्रास्फीति पर असर पड़ेगा और उसके कारण मौद्रिक नीति कड़ी होगी। इसका निवेश और अंतत: आर्थिक वृद्धि पर नकारात्मक असर पड़ेगा।

एसोचैम अध्यक्ष राजकुमार धूत ने कहा कि हालांकि बजट को लेकर विभिन्न तबकों की आलोचना सुनने को मिली है लेकिन अगर कुछ हटकर देखा जाए तो बजट का अलग स्वरुप दिखाई देगा। उन्होंने कहा कि अनिश्चितताओं के बीच बजट में कुछ अच्छी चीजें भी हैं। प्रणव दा ने अर्थव्यवस्था में निवेश खासकर निजी निवेश बढ़ाने की अहमियत को पहचाना है। हालांकि, धूत ने विनिर्माण गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिये प्लांट एवं मशीनरी के मामले में मूल्यह्रास दर को मौजूदा 15 प्रतिशत से बढाकर 25 प्रतिशत करने का आग्रह किया।

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