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अमेरिका का गुजरात सरकार से अनुरोध

गुजरात दंगों की दसवीं बरसी के अवसर पर अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में एक प्रस्ताव पेश किया गया जिसमें गुजरात में धार्मिक स्वतंत्रता बहाल करने का राज्य सरकार से अनुरोध किया गया है।

गुजरात में दुखद सांप्रदायिक हिंसा की 10वीं बरसी पर इस गैर बाध्यकारी प्रस्ताव (एच रेस 569) को प्रतिनिधि सभा में इस हफ्ते की शुरुआत में अमेरिकी कांग्रेस सदस्य कीथ एलिसन ने पेश किया। इस तरह के अन्य प्रस्तावों में जैसा होता है उसके विपरीत इस प्रस्ताव में कोई सह प्रायोजक नहीं था।

प्रस्ताव को जरूरी कार्रवाई के लिए प्रतिनिधि सभा की विदेश मामलों की समिति के पास भेज दिया गया है। गोधरा कांड में जान गंवाने वाले लोगों समेत गुजरात में 2002 में हुई हिंसा से प्रभावित लोगों की पीड़ा को मान्यता देते हुए प्रस्ताव में अमेरिकी विदेश मंत्रालय की इस राय को साझा किया गया है कि गुजरात सरकार ने हिंसा पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किया है।

साल 2002 की हिंसा में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की कथित संलिप्तता के बारे में पत्रकारों और मानवाधिकार समूहों की रिपोर्ट पर चिंता जताते हुए प्रस्ताव में 1998 के अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन करने के आधार पर साल 2005 में मोदी को वीजा नहीं देने के लिए अमेरिकी सरकार की सराहना की गई है।

भारतीय अमेरिकी मुस्लिम परिषद (आईएएमसी) ने एक वक्तव्य में प्रतिनिधि सभा में पेश किए गए इस प्रस्ताव का स्वागत किया है। आईएएमसी अध्यक्ष शाहीन खातिब ने कहा, कांग्रेस सदस्य एलिसन का प्रस्ताव गुजरात में साल 2002 की धार्मिक हिंसा में मारे गए लोगों को याद करने की दिशा में अहम प्रयास है।

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