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बजट पर विश्लेषकों की मिलीजुली प्रतिक्रिया

बजट प्रस्तावों पर बाजार विश्लेषकों ने मिलीजुली प्रतिक्रिया दी है। जहां कुछ विश्लेषकों ने इसे पूंजी बाजार के लिए उचित और सकारात्मक करार दिया है, वहीं कुछ अन्य ने वित्तीय मजबूती की रूपरेखा न होने पर चिंता जताई है।

विश्लेषकों का कहना है कि निवेशकों को सोमवार को बाजार खुलने पर सतर्कता बरतनी चाहिए। बोनान्जा पोर्टफोलियो के वरिष्ठ उपाध्यक्ष राकेश गोयल ने कहा, लघु अवधि का रुख मंदी का होगा। इसमें और गिरावट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में 5,260 से 5,270 के स्तर पर कुछ समर्थन दिख सकता है। इस स्तर से तकनीकी सुधार की उम्मीद की जा सकती है।

कोटक सिक्योरिटीज के प्रमुख (शोध) दीपेन शाह ने कहा कि शेयर बाजार के दृष्टिकोण से प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) में मामूली कटौती से कुछ लाभ मिल सकता है। टाटा एसेट मैनेजमेंट के अनुसंधान प्रमुख प्रदीप गोखले ने कहा, बजट में बुनियादी ढांचा, कृषि और पूंजी बाजार के लिए कुछ सकारात्मक है। भारतीय बाजार अभी भी वैश्विक तरलता की स्थिति से प्रभावित होता है।

बजट में उत्पाद शुल्क और सेवा कर में दो प्रतिशत की वृद्धि का प्रस्ताव है, जबकि आयकर के मामले में लोगों को कुछ राहत दी गई है। पद्माक्षी फाइनेंशियल सर्विसेज के निदेशक (संस्थागत इक्विटी एवं मुख्य रणनीतिकार) सैलाव काजी ने कहा, उत्पाद शुल्क और सेवा कर में बढ़ोतरी राजस्व जुटाने की दिशा में अच्छा कदम है। इससे वित्तीय मजबूती मिलेगी और भारतीय रिजर्व बैंक अप्रैल की मौद्रिक नीति की समीक्षा में ब्याज दरों में कुछ कटौती कर सकता है।

उन्होंने कहा कि बजट से पूंजी बाजार की धारणा बनाने में मदद मिलेगी। इसमें नकारात्मक कम है, हालांकि सुधार भी बहुत अधिक नहीं हैं। गोयल ने कहा कि आगे चलकर बजट प्रस्तावों से बिजली, खनन और कपड़ा क्षेत्र की कंपनियों को फायदा होगा। जबकि फार्मा और वाहन क्षेत्र पर इसका नकारात्मक असर पड़ेगा।

नियोजित पीएनबी परिबा के सहायक उपाध्यक्ष गौरांग शाह ने कहा कि बजट में वित्तीय मजबूती तथा बड़े सुधारों की रूपरेखा की कमी है। करदाताओं को आयकर में मामूली राहत दी गई है, लेकिन सेवा कर, उत्पाद शुल्क और सीमा शुल्क में बढ़ोतरी से आम आदमी पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।

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