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कर राहत, सब्सिडी में कटौती व सुधारों का वादा

केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने शुक्रवार को लोकसभा में 2012-13 के लिए आम बजट पेश करते हुए लोगों को व्यक्तिगत कर राहत देने, काले धन पर रोक लगाने, अधोसंरचना, पूंजी बाजार में सुधार को बढ़ावा देने के वादों के साथ सब्सिडी में भारी कटौती की  बात कही।

बजटीय प्रस्तावों से लोगों को व्यक्तिगत रूप से कुछ प्रत्यक्ष कर राहत मिलेगा, भले ही खाना-पीना, महंगी कारें खरीदना, हवाई यात्रा, कुछ पेशेवर सेवाओं का लाभ लेना और सोने के जेवरात खरीदना महंगा हो जाएगा।

मुखर्जी ने केंद्रीय वित्त मंत्री के रूप में अपना सातवां आम बजट पेश करते हुए कहा कि व्यक्तिगत आय कर से छूट की सीमा 1,80,000 रुपये से बढ़ाकर 2,00,000 रुपये की जा रही है, जबकि शिखर दर की सीमा आठ लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये की जा रही है।

मुखर्जी ने कहा, ''इससे प्रत्येक करदाता को 2,000 रुपये की राहत मिलेगी। प्रत्यक्ष करों पर मेरे प्रस्ताव के कारण 4,500 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान होगा।''

मुखर्जी ने नए कर स्तरों की भी घोषणा की, जिसके तहत 2,00,000 रुपये तक की आय पूरी तरह करमुक्त होगी, 2,00,000 रुपये से 5,00,000 रुपये तक की आय पर 10 प्रतिशत कर होगा और उसके बाद 5,00,000 रुपये से 10,00,000 रुपये तक की आय पर 20 प्रतिशत कर तथा 10,00,000 से ऊपर की आमदनी पर 30 प्रतिशत कर लागू होगा।

मुखर्जी ने कहा कि कारपोरेट क्षेत्र के लिए यद्यपि कर दरें अपरिवर्तित हैं, लेकिन उन्होंने इस क्षेत्र के विस्तार के लिए धन की आसान उपलब्धता का भरोसा दिलाया। भले ही उन्होंने खास वस्तुओं पर उत्पाद शुल्क दरें और सीमा शुल्क बढ़ा दी। मुखर्जी ने सेवा कर को मौजूदा 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत करने का प्रस्ताव किया है।

मुखर्जी ने सुबह ठीक 11 बजे अपना भाषण शुरू किया और उसे 110 मिनट में पूरा किया। इस दौरान उन्होंने सामाजिक कल्याण की योजनाओं व उद्योगों को लाभ पहुंचाने से लेकर राजकोषीय समेकन व क्षेत्र केंद्रित सुधारों जैसे कई प्रस्ताव गिनाए।

पूंजी बाजार को और उदार बनाने का आश्वासन देते हुए मुखर्जी ने एक नई इक्विटी बचत योजना घोषित की, जिसके तहत इक्विटी में 50,000 रुपये के निवेश पर 50 फीसदी की आयकर छूट मिलेगी। इसके लिए वार्षिक आमदनी 10 लाख रुपये से कम होनी चाहिए।

मुखर्जी ने अपने भाषण की शुरुआत देश पर वैश्विक मंदी के कुप्रभाव से की, परंतु उन्होंने लोगों को आश्वस्त किया कि सुधार के स्पष्ट संकेत हैं और 2012-13 में देश की विकास दर मौजूदा वित्त वर्ष के 6.9 प्रतिशत के मुकाबले 7.6 प्रतिशत होगी।

मुखर्जी ने कहा, ''वैश्विक आर्थिक संकट ने हमें प्रभावित किया है। देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की विकास दर 2011-12 के दौरान 6.9 फीसदी रहने का अनुमान है, जबकि पिछले दो वर्षो से 8.4 फीसदी थी।''

मुखर्जी ने कहा, ''यद्यपि अर्थव्यवस्था पर मंदी के कुप्रभावों को कम करने में हम सक्षम रहे हैं, लेकिन इस वर्ष का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है। फिर भी भारत अन्य देशों की तुलना में आर्थिक विकास के मामले में अग्रिम पंक्ति के देशों में खड़ा है।''

मुखर्जी ने यह भी कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था सुधार के मुहाने पर खड़ी है, क्योंकि कृषि एवं सेवा क्षेत्र में संतोषजनक रफ्तार से वृद्धि हो रही है। लेकिन औद्योगिक प्रदर्शन हमारे पैर पीछे खींच रहा है।

केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा, ''यद्यपि चालू वित्त वर्ष (2011-12) की अंतिम तिमाही के पूरे आंकड़े हमारे पास उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन इस अवधि के दौरान उपलब्ध संकेतकों से पता चलता है कि अर्थव्यवस्था में सुधार हो रहा है। कोयला, उर्वरक, सीमेंट एवं बिजली क्षेत्रों से सुधार के संकेत मिले हैं।''

मुखर्जी ने नए आर्थिक प्रस्तावों में भरोसा दिलाया है कि वह सब्सिडी में कटौती करेंगे, और ऐसी नीतियां बनाएंगे कि सब्सिडी सीधे किसानों को हस्तांतरित कर दी जाए। यह नीति नंदन नीलेकणी की रपट पर आधारित होगी।

मुखर्जी ने यह भी आश्वस्त किया कि एकसमान अखिल भारतीय वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के लिए आवश्यक एक नेटवर्क इस वर्ष के अगस्त तक तैयार कर लिया जाएगा और इसकी तैयारी से सम्बंधित प्रक्रिया को यथासम्भव जल्द से जल्द शुरू किया जाएगा।

केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार प्रत्यक्ष कर संहिता पर एक संसदीय समिति की सिफारिशों का भी परीक्षण कर रही है और यह व्यवस्था जल्द ही लागू की जाएगी। मुखर्जी ने कहा कि देश में निवेश के वातावरण तैयार करने की कोशिश के तहत पूंजी बाजारों पर नियंत्रण रखने वाले नियमों में सुधार करना और उसे आसान बनाना सरकार का लक्ष्य है।

मुखर्जी ने कहा कि चूंकि 12वीं पंचवर्षीय योजना पहली अप्रैल से शुरू हो रही है, लिहाजा उनकी सरकार पांच प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करेगी।
 
- घरेलू मांग बढ़ाने वाली नीतियां बनाना।
- निजी निवेश में तीव्र वृद्धि सुनिश्चित करना।
- कृषि, ऊर्जा, यातायात, कोयला, विद्युत और राष्ट्रीय राजमार्गो के विकास के लिए बाधाएं दूर करना।
- कुपोषण से निपटना।
- निर्णयों के क्रियान्वयन, सेवा आपूर्ति एवं पारदर्शिता के साथ अच्छा प्रशासन और भ्रष्टाचार एवं कालेधन पर अंकुश लगाने के उपाय करना।

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