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स्कूलों में कोटे की कितनी सीटें खाली हैं: हाईकोर्ट

समाज के कम आय वर्ग (ईडब्लूएस) के उन लोगों के लिए राहत भरी खबर है जिनके बच्चे को नि:शुल्क कोटे के तहत किसी भी निजी स्कूल में अब तक दाखिला नहीं मिला। शिक्षा के अधिकार अधिनियम को लेकर सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बाद हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार से यह बताने के लिए कहा है कि निजी स्कूलों में नि:शुल्क कोटे के तहत वर्तमान शैक्षणिक सत्र में कितनी सीटें खाली हैं।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ए.के. सीकरी व न्यायमूर्ति राजीव सहाय एंडलॉ की पीठ ने इसके लिए सरकार को दिन का वक्त दिया है। पीठ ने दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय को शुक्रवार तक निजी स्कूलों में खाली सीटों के साथ-साथ उन स्कूलों के बारे में में विस्तृत जानकारी देने को कहा है जो ईडब्लूएस कोटे के तहत 25 फीसदी सीटों का दाखिला नहीं दे रहे हैं। हाईकोर्ट ने यह आदेश अधिवक्ता अशोक अग्रवाल की उन दलीलों पर दिया जिसमें उन्होंने कहा है कि दिल्ली के करीब 725 निजी स्कूल शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत 25 फीसदी सीटों पर कम आय वर्ग के बच्चों को दाखिला नहीं दे रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि दाखिला बंद होने के बाद भी अधिकांश स्कूलों में हजारों सीटें खाली है लेकिन शिक्षा निदेशालय उन सीटों को भरने के लिए कोई कदम नहीं उठा रहा है।

अधिवक्ता अशोक अग्रवाल ने कहा कि अगर कोटे के तहत यदि निजी स्कूलों में सीटें खाली रहती हैं तो उसे भरने की जिम्मेदारी और किसी की नहीं बल्कि दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय की है। सुप्रीम कोर्ट ने गत शुक्रवार को कहा था कि निजी स्कूलों को ईडब्लूएस कोटा के तहत 25 फीसदी सीटों पर कम आय वर्ग के लोगों को नि:शुल्क शिक्षा देना होगा।

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