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श्रीलंका नहीं जाएंगे डीएमके सदस्यः करूणानिधि

द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (डीएमके) के अध्यक्ष एम करूणानिधि ने श्रीलंका में पुर्ननिर्माण एवं राजनीतिक प्रक्रिया का जायजा लेने के लिये इस हफ्ते वहां का दौरा करने वाले संसदीय प्रतिनिधिमंडल में उनकी पार्टी के शामिल होने का खंडन किया। उन्होंने कहा कि विगत के अनुभव बताते हैं कि ऐसे दौरों का कोई फायदा नहीं है।

करूणानिधि ने संवाददाताओं से कहा कि डीएमके की कभी योजना (प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा होने की) नहीं थी। लिहाजा डीएके से कोई उसमें शामिल नहीं हो रहा है। लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज के नेतृत्व में जा रहे सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल में लोकसभा सदस्य टीकेएस एलनगोवन डीएमके के एकमात्र प्रतिनिधि थे।

इससे पहले तमिलनाडु से डीएमके और कांग्रेस सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने 2010 में श्रीलंका का दौरा किया था और उसमें डीएमके की तरफ से करूणानिधि की पुत्री कनिमोझी और टीआर बालू तथा विदुथलई चिरूथईगल काच्चि के संस्थापक थोल तिरूमावलावन शामिल थे।

डीएमके के प्रतिनिधिमंडल में शामिल होने से इनकार के बाद 16 से 22 अप्रैल तक श्रीलंका का दौरा करने वाले प्रतिनिधिमंडल में राज्य के दो बड़े दलों का उसमें प्रतिनिधित्व नहीं है। सत्तारूढ अन्नाद्रमुक पहले ही अपने प्रतिनिधियों को वापस ले चुका है।

कार्यक्रम को लेकर असंतोष जाहिर करते हुए अन्नाद्रमुक नेता और मुख्यमंत्री जे जयललिता ने प्रतिनिधिमंडल से अपने एकमात्र प्रतिनिधि ए विलियम रबी बर्नार्ड का नाम वापस ले लिया था।

जयललिता ने आंतरिक रूप से विस्थापितों के प्रति तमिल विरोधी रवैया तथा मछुआरों पर श्रीलंकाई नौसेना के हमलों को लेकर श्रीलंका सरकार की आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि पहले के दौरे की तरह वह नहीं चाहती कि दौरा महज आंख में धूल झोंकने वाला हो।

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