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रेल बजट में बिहार को केंद्र की इनायत की आस

बिहार ने वैसे तो देश को कई रेलमंत्री दिए लेकिन आज इस प्रदेश के लोगों को ही रेल बजट में 'ममता' की दरकार है। बिहार में कई ऐसी रेल परियोजनाएं हैं जिनकी घोषणाएं तो पहले हो चुकी हैं लेकिन आज भी इन पर कार्य शुरू नहीं हो सका है। 

बिहार के लोगों का आरोप है कि पिछले दो-तीन वर्षों के रेल बजट में लगातार बिहार की उपेक्षा हो रही है। जो कुछ भी बिहार को मिल रहा है वह 'लॉलीपॉप' से ज्यादा कुछ नहीं है। लोग मानते हैं कि बिहार आज रेल के क्षेत्र में काफी पीछे है।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव, लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के अध्यक्ष रामविलास पासवान जब देश के रेल मंत्री थे तब बिहार में कई रेल परियोजनाएं आईं और कई महत्वपूर्ण रेलगाडिम्यां भी मिलीं लेकिन उसके बाद से बिहार को रेल मंत्रालय से ममतामयी नजर की प्रतीक्षा है।

बिहार में कई ऐसे क्षेत्र भी हैं जो आज तक रेल के पहुंचने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। बिहार में हरनौत रेल कारखाना आज तक सरजमीन पर नहीं उतर सका है तो मढ़ारा डीजल इंजन कारखाना भी अपने पूर्ण होने की प्रतीक्षा कर रहा है।

इसी तरह छपरा पहिया कारखाना से भी अब तक उत्पादन प्रारंभ नहीं हो सका है तो मधेपुरा इलेक्ट्रिक इंजन कारखाना भी अब तक सरकारी फाइलों में गुम है। ये बिहार की कई ऐसी रेल परियोजनाएं हैं जिनसे न केवल यहां के बेरोजगारों को रोजगार मिल सकता था बल्कि विकास के नए आयाम जुड़ सकते हैं।

बिहार चैंबर ऑफ  कॉमर्स का भी मानना है कि पटना से नई दिल्ली, मुम्बई, चेन्नई तक दुरंतो एक्सप्रेस इस बजट की सबसे प्रमुख मांगों में से एक है। बिहार अब विकास की ओर बढ़ गया है ऐसे में रेल बजट में इस राज्य की उपेक्षा न केवल यहां के लोगों के साथ विश्वासघात होगा बल्कि बिहार के विकास में बाधा साबित होगी।

बिहार के लोगों का कहना है कि बिहार में आज पर्यटकों की संख्या गोवा जैसे पर्यटक स्थलों से भी अधिक है। ऐसे में आवागमन की सुविधा न होना इस क्षेत्र की उपेक्षा होगी।

मुख्यमंत्री भी समय-समय पर रेल मंत्रालय को पत्र लिखकर बिहार की कई रेल परियोजनाओं और कई रेलगाड़ियों की मांग कर चुके हैं। पटना जंक्शन पर भारी भीड़ को देखते हुए दानापुर और राजेंद्रनगर रेलवे स्टेशन को विकसित करने की आवश्यकता है जबकि कई स्थानों के लिए नई रेलगाड़ियों की मांग की गई है।

बहरहाल, बिहार के लोगों को इस रेल बजट से बहुत उम्मीदें हैं। ऐसे में लोगों का कहना है कि रेल मंत्रालय नया कुछ दे या न दे, इतना तो जरूर कर दे कि बिहार की लम्बित और अधूरी परियोजनाओं को धन उपलब्ध करा दे और उसे समय सीमा के अंदर ही पूरा कर दे।

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