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'कचरे के साथ ठिकाने लगाए 9/11 के पीड़ितों के अवशेष'

अमेरिका पर 11 सितम्बर 2001 के आतंकवादी हमले में मारे गए करीब 3000 लोगों के अवशेषों को जलाने के बाद कचरे के साथ ठिकाने लगा दिया गया। यह जानकारी अमेरिकी रक्षा विभाग की एक रपट में दी गई है।

यह बात एक स्वतंत्र जांच आयोग की पड़ताल के दौरान सामने आई है। आयोग ऐसे आरोपों की जांच कर रहा था कि डेलावेयर्स डोवर एयर फोर्स बेस के मुर्दाघर में अफगानिस्तान और इराक में मारे गए अमेरिकी सैन्य कर्मियों के शवों के साथ अच्छा सलूक नहीं किया गया था।

राष्ट्रपति बराक ओबामा के प्रशासन की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि हम इन रपटों से बेहद चिंतित हैं कि 2001 में कुछ अज्ञात लोगों के अवशेष कचरे के साथ ठिकाने लगा दिए गए और डोवर में उन अवशेषों के साथ अच्छा सलूक नहीं किया गया।

व्हाइट हाउस के अनुसार ओबामा को डोवर पोर्ट मुर्दाघर की स्वतंत्र जांच के बारे में जानकारी दी गई है और वह इस बात का पुरजोर समर्थक हैं कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए रक्षा विभाग में व्यवस्थित ढांचागत बदलावों की जरूरत है।

बयान में कहा गया है कि अमेरिका का दायित्व बनता है कि वह सेना के जवानों और उनके परिजनों तथा 9/11 में मारे गए लोगों के साथ करुणापूर्ण और पेशेवर तरीके से व्यवहार करे। रक्षा मंत्री लियोन पनेटा ने सैन्य कर्मियों के परिजनों की शिकायतों के आधार पर जांच के आदेश दिए।

आयोग ने जांच में पाया कि पेंसिलवेनिया में दुर्घटनाग्रस्त हुए विमान में मारे गए लोगों में से कुछ के अवशेष डोवर मुर्दाघर भेज दिए गए। यही उन दिनों की मानक प्रक्रिया ही थी। उन्हें जला दिया गया और दबाने के लिए एक निजी बॉयोकेमिकल-वेस्ट कांट्रैक्टर को दे दिए गए।

सेना की जानकारी के बगैर उस कांट्रैक्टर ने उनमें से कुछ के अवशेषों को कचरा के साथ फेंक दिया। रक्षा विभाग ने वर्ष 2008 में डोवर में अपनी नीति में बदलाव किया। उसके बाद से इन अवशेषों को समुद्र में बहाया जाता है।

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