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बदलती रहीं जांच एजेंसियां, पर बरमेश्वर के कातिलों तक नहीं पहुंचे हाथ

पहले एसआईटी, फिर भोजपुर पुलिस और उसके बाद सीबीआई जांच, पर नतीजा सिफर। यह हाल प्रतिबंधित रणवीर सेना के संस्थापक बरमेश्वर मुखिया हत्याकांड का है। पांच साल बाद भी सूबे के इस बहुचर्चित हत्याकांड का खुलासा नहीं हो सका है। जांच एजेंसियां बदले जाने के बाद भी मुखिया के कातिलों की पहचान तक नहीं की जा सकी है। इनाम की घोषणा के बाद भी हत्यारों का सुराग नहीं मिल सका। सीबीआई भी इस मामले में अब तक किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहंुच सकी है। मालूम हो कि हत्या के बाद जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया था। 30 दिनों के अंदर एसआईटी ने अपनी जांच रिपोर्ट सौंप दी। इसके बाद एसआईटी को भंग कर भोजपुर के तत्कालीन एसपी को हत्या की जांच का जिम्मा दिया गया। बाद में मुखिया के परिजनों की मांग पर बिहार सरकार द्वारा मामला सीबीआई को सौंप दिया गया। इसके बाद सीबीआई द्वारा अपने स्तर से मामले की तफ्तीश शुरू की गयी। इस दौरान सीबीआई द्वारा कई लोगों से पूछताछ की गयी। घटनास्थल व मुखिया के कपड़ों व पिलेट की वैज्ञानिक तरीके से जांच की गयी। एफआईआर से लेकर पोस्टमार्टम रिपोर्ट सहित अन्य कागजातों का भी अवलोकन किया गया। इसे ले सीबीआई के अफसर कई दिनों तक आरा में डेरा डाले रहे। हत्यारों का सुराग देने के लिए इनाम देने की घोषणा भी की गयी। इसके बावजूद कोई सुराग नहीं मिल सका। रंगदारी पर ही अटकी रही तीनों एजेंसियों की जांचमुखिया हत्याकांड की जांच रंगदारी मांगे जाने व उसके विरोध में गोली मारे जाने से आगे नहीं बढ़ रही है। एसआईटी व भोजपुर पुलिस की जांच इस बिन्दु पर ही पूरी हो गयी। हालांकि सीबीआई की जांच का दायरा इससे कुछ आगे बढ़ा है। सीबीआई रंगदारी के अलावा संगठन के अंदर वर्चस्व की लड़ाई, हथियार का विवाद व प्रतिद्वंद्वी भाकपा माले से प्रतिशोध के मामले पर जांच कर रही है। बता दें कि एसआईटी की जांच में एक स्कूल संचालक से रंगदारी मांगने का विरोध करने पर मुखिया को गोली मारे जाने की बात सामने आयी थी। बाद में भोजपुर के तत्कालीन एसपी की जांच भी इसी मामले पर आकर पूरी हो गयी थी। भोजपुर पुलिस तो इस मामले में कुछ आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भी भेज चुकी है। आठ आरोपितों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है। हत्या के बाद खूब मचा था बवालरणवीर सेना के प्रमुख बरमेश्वर मुखिया की हत्या एक जून को आरा के नवादा थाना क्षेत्र के कतिरा स्थित उनके आवास के समीप की गयी थी। अहले सुबह टहलने के दौरान की गयी हत्या के बाद पूरे बिहार में आक्रोश भड़क गया था। आरा में तो लोगों ने जमकर उपद्रव मचाया था। दलित छात्रावास को फूंक दिया गया था। जगह-जगह तोड़फोड़ व आगजनी की गयी थी। आरा पहंुचे तत्कालीन डीजीपी अभयानंद व जिले के एक तत्कालीन विधायक सहित कई अफसरों के साथ हाथापाई तक की गयी थी। दूसरे दिन पटना में भी आगजनी व तोड़फोड़ की गयी थी।

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  • Web Title:Changing agencies, but not reaching the killers