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9 दिसंबर, 2019|3:57|IST

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नखरेबाज है बच्चा तो आप संभालें ऐसे

नखरेबाज है बच्चा तो आप संभालें ऐसे

कभी चॉकलेट की जिद तो कभी देर तक खेलने की जिद, कभी स्कूल जाने का मन न होने पर, तो कभी और कोई फरमाइश पूरी नहीं होने पर आपका नन्हा नवाब न केवल रूठ जाता है, बल्कि अपनी बात मनवाने के लिए जोर-जोर से रोने लगता है। बात पूरी न होने पर चीखना, चिल्लाना, गुस्से में चीजें पटकना और यहां तक कि कई बार जब उसका गुस्सा ज्यादा बढ़ जाता है तो वह दांत काटने और मारने-पीटने भी लगता है। अपोलो हॉस्पिटल के कंसल्टेंट मनोविशेषज्ञ डॉ़  धीरेंद्र कुमार के अनुसार, ‘आमतौर पर 1 से 5 साल की उम्र के सभी बच्चों में यह आदत होती है। अपनी नाराजगी, झुंझलाहट या गुस्सा जाहिर करने के लिए या अपनी अनचाही जिद पूरी करवाने के लिए वे इस प्रकार की प्रतिक्रिया करने लगते हैं।’ कैसे निपटें बच्चे की इन आदतों से, आइए जानें...

करें नजरअंदाज

कई बार स्थिति को संभालने के लिए समस्या से निपटने की कोशिश करने से बेहतर होता है उसे नजरअंदाज करना। जरूरी नहीं कि हर बार बच्चे के आवेश में आने पर आप उसे डांटने या समझाने की कोशिश करें। कई बार इसे नजरअंदाज करने पर भी बच्चा थोड़ी देर में खुद ही शांत हो जाता है।

थोड़ी समझदारी बरतें

आप अपने बच्चे की बेहतरी के लिए कई नियम बनाना चाहती हैं। लेकिन इतनी छोटी-सी उम्र में उसके लिए यह सब समझना बेहद झंझट भरा होता है। हर बात पर ‘ना’ कहने की जगह उसी बात को स्मार्ट अप्रोच से डील करें। जैसे बच्चा चाहता है कि आप उसके साथ उसी समय खेलें। ऐसे में उसे अभी नहीं खेल सकते, कहने की जगह आप यह कह सकती हैं कि आप अभी सो जाओ, उठने पर हम दोनों मजेदार खेल खेलेंगे, जैसी बातें कहें। बच्चे पर अपनी बात थोपने की जगह उसे ऐसे समझाएं कि आप उसी की बातें मान रही हैं। इसी के साथ जरूरी है, बच्चे का भरोसा जीतना। बच्चा आपकी कही बातों को तभी आसानी से मानना सीखेगा, जब आप उस पर अपना विश्वास जमा पाएंगी। इसलिए बच्चे से किए गए हर छोटे-बड़े वादों को जरूर निभाएं। इस प्रकार आप उस पर अपना भरोसा जमा पाएंगी।

शांत होने पर समझाएं

बच्चा जब झल्लाहट या गुस्से की अवस्था में हो तो उस समय सबसे जरूरी है, खुद पर काबू रखना। ऐसी स्थिति में उसे डांटने या कुछ भी समझाने की कोशिश उसे और भी अशांत कर देगी। बच्चे के शांत होने पर उसे प्यार से समझाएं और बताएं कि उसका ऐसा व्यवहार आपको अच्छा नहीं लगा और उसकी बात तभी सुनी जाएगी, जब वह शांति से बात करेगा।

सजा और इनाम

बच्चे के गुस्से से निपटने के लिए कभी भी इनाम या सजा को हथियार के तौर पर इस्तेमाल न करें। किसी बात के लिए मना करने पर बच्चा कंट्रोल से बाहर होकर ऐसी ही हरकतें करने लगे तो उसकी वह फरमाइश हरगिज पूरी न करें, जिसके लिए पहले आप मना कर चुकी हैं और न ही शांत होने पर मनपसंद चीज देने का लालच दें।

बनें रोल मॉडल

बच्चों का गुस्से में इस प्रकार की प्रतिक्रिया करना साधारण है। यह उसका अपनी बात कहने का अपना तरीका है। लेकिन अगर ऐसा अकसर होने लगे या बच्चे के गुस्से की तीव्रता खतरनाक स्तर तक बढ़ने लगे तो ध्यान दें कि कहीं आप अपने व्यवहार से उसके सामने कुछ ऐसा ही उदाहरण तो नहीं रख रहीं? बच्चा सबसे पहले अपने पेरेंट्स को ही अपने रोल मॉडल के रूप में देखता है। इसलिए घर में किसी भी प्रकार की स्थिति में क्या आपका व्यवहार संयत है, इस बात पर जरूर ध्यान दें। अपना व्यवहार संयमित रखें।

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