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पुतिन का खतरनाक जुनून

अमेरिका और रूस अब यह योजना बना रहे हैं कि अगर सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल-असद अपने उन शहरों में ट्रकों के प्रवेश की इजाजत नहीं देते, जो घेरेबंदी में हैं, तो फिर विमानों के जरिये जरूरतमंदों तक खाने-पीने की चीजें व दूसरी आपातकालीन सुविधाएं पहुंचाई जाएं।

हवाई रास्ते से मदद पहुंचाना एक जोखिम भरा व हताश कदम है, जो न सिर्फ खर्चीला है, बल्कि इसमें जरूरतमंदों तक मदद के पहुंचने की भी कोई गारंटी नहीं। यही नहीं, अगर इस कवायद में जरा-सी भी चूक हुई, तो जिनकी मदद के इरादे से यह कदम उठाया जाएगा, वे जख्मी भी हो सकते हैं और उनकी जान भी जा सकती है। जमीनी स्तर पर यह योजना इन दोनों देशों की एक मानवीय पहल लगती है, क्योंकि अमेरिका और रूस, दोनों सीरिया में वर्षों से जारी खूनी गृह युद्ध को खत्म कराने की साझा मुहिम से जुड़े हैं। लेकिन इस योजना ने फिर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के दोहरेपन को उजागर किया है।

असद आज भी सीरिया की हुकूमत में इसीलिए बने हुए हैं, क्योंकि रूस बड़े पैमाने पर उनकी फौजी मदद कर रहा है। इस पर यकीन करना मुश्किल है कि व्लादिमीर पुतिन, जिन्हें कि इस बात का गुमान रहता है कि वह जो चाहें, कर सकते हैं, सीरियाई राष्ट्रपति को घेरेबंदी वाले अपने शहरों से राहत सामग्री भरे ट्रकों को निकलने देने के लिए राजी न कर सकें।

हालांकि अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी से उन्होंने वादा किया है कि अब तक चार लाख, 70 हजार लोगों को लील चुकी सीरियाईर् जंग को खत्म कराने में वह अमेरिका के साथ मिलकर काम करेंगे, मगर पुतिन ने राष्ट्रपति असद को सीरियाई नागरिकों पर गोलाबारी करने से रोकने के प्रति कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई, बल्कि जैसी खबरें हैं, रूस खुद अपने हवाई हमले वहां जारी रखे हुए है।

कुछ समय के लिए लागू युद्ध विराम ने स्थायी शांति की उम्मीद जगाई थी, लेकिन अब वह आशा कमोबेश धराशायी हो चुकी है। पुतिन के लिए सीरिया महज एक रणभूमि है, जिसमें रूस को महान बनाने की उनकी जुनूनी कोशिश ने वहां न सिर्फ और अधिक अस्थिरता बढ़ा दी है, बल्कि राजनीतिक संदेह को भी गहरा कर दिया है।
द न्यूयॉर्क टाइम्स, अमेरिका

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