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केंद्र को जोरदार झटका

इसे कहते हैं रंग बदलते लोग। सर्वोच्च न्यायालय ने जब उत्तराखंड विधानसभा में बहुमत परीक्षण की तिथि 10 मई निर्धारित कर दी, तो भाजपाई अब कह रहे हैं कि 'हम भी फ्लोर टेस्ट चाहते ही थे'। अच्छा? अगर यही सच्चाई है, तो उत्तराखंड के मामले को लंबी दूरी तय करते हुए सवार्ेच्च न्यायलय तक कैसे आना पड़ा? क्यों नहीं राज्यपाल महोदय द्वारा तय तिथि पर शक्ति परीक्षण करवा लिया गया? चलो ठीक है, एक बार भूल हो गई। मगर जब नैनीताल उच्च न्यायालय ने यही बात कही, तो उसे क्यों दरकिनार कर दिया गया? अब अंतिम अदालत ने जब कह दिया, तो आपके पास भला और क्या चारा बच जाता है? अब एक ही हथियार केंद्र सरकार के पास बचा है। जल्द से जल्द सीबीआई के जरिये हरीश रावत की गिरफ्तारी करवाई जाए। वैसे भी स्टिंग ऑपरेशन के मामले में उन्हें नोटिस भिजवाया जा ही चुका है। अगर इस हथियार का इस्तेमाल भाजपा करती है, तो उसकी और छीछालेदर ही होगी।
जंग बहादुर सिंह, गोलपहाड़ी

कब स्वच्छ होगी व्यवस्था
आज केंद्र सरकार स्वच्छ भारत मिशन, निर्मल भारत अभियान जैसे कार्यक्रम जोर-शोर से चला रही है, मगर असलियत कुछ और ही है। गांव मे तैनात सफाईकर्मी या तो आते नहीं या फिर दूसरे से काम करवाते हैं। शौचालयों के लिए दिया गया अनुदान लाभार्थी तक पहुंचा भी या नहीं, यह देखने वाला कोई नही है। कागजों पर वृक्षारोपण होकर धनराशि ले ली जाती है, लेकिन पेड़ कहां-कहां लगे हैं- यह खुद वृक्षारोपण करने वाले अधिकारी तक को मालूम नहीं होता।
अनंत कुमार

जल-नीति की जरूरत
आज पूरी दुनिया में पानी की समस्या एक विकराल रूप ले चुकी है। किसी  ने सही कहा था कि भविष्य में तीसरे विश्व युद्ध का कारण पानी ही होगा। इसे अब नकारा भी नहीं जा सकता। कई देश अपने गिरते भू-जल स्तर को थामने के लिए आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। मगर अपने देश में अब तक सिर्फ योजनाएं ही बनाई जा रही हैं, और वे भी सिर्फ कागजों तक ही सीमित हैं। आज पश्चिम से लेकर दक्षिण व उत्तरी भारत का बड़ा हिस्सा भयानक सूखे की चपेट में है। लोग बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं। पानी न मिल पाने के कारण कई लोगों की मौत भी हो चुकी है। इसके जिम्मेदार क्या हम खुद नहीं हैं? अब समय आ चुका है कि हम पानी का बड़े पैमाने पर संग्रहण करें और इस मानसून में बारिश की एक बूंद भी बर्बाद न होने दें।
रिहान परवेज, बिजनौर, उत्तर प्रदेश

निजी स्कूलों की मनमानी
सभी प्राइवेट स्कूलों की जांच होनी चाहिए। अधिकतर निजी स्कूल अभिभावकों को लूट रहे हैं। महंगी किताबों के साथ ही अनाप-शनाप वस्तुएं खरीदने को विवश किया जा रहा है। ये स्कूल हर वर्ष ड्रेस कोड बदल देते हैं। कोई तो हर वर्ष दाखिला शुल्क लेता है, तो कोई इसे वार्षिक शुल्क के रूप में वसूलता है। इसलिए जांच में जो भी स्कूल दोषी पाए जाएं, उन पर सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। अभिभावकों से भी अनुरोध है कि वे चुपचाप इन स्कूलों की मनमानी बर्दाश्त न करें। सभी लोगों की संगठित आवाज इन स्कूलों के भ्रष्टाचार पर लगाम लगा सकती है।
मिर्जा सलमान हसन
पुरानी बस्ती, बस्ती

साजिश की बू
वैसे तो हर साल जंगल में आग के मामले सामने आते हैं, लेकिन इस साल तो कुछ ज्यादा ही यह घटना हो रही है, जिससे व्यापक नुकसान हो रहा है। इस साल इतनी ज्यादा आग क्यों लग रही हैं या फिर यह कोई साजिश है? दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने तो खुलकर कह दिया कि आग के पीछे भाजपा का हाथ है। अगर यह बात सच है, तो इससे भाजपा सरकार की खराब मानसिकता सामने आती है।
मोनो कुमारी, देहरादून

 

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