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रेलवे की नाकामी

नए रेल मंत्री के रूप में सुरेश प्रभु को लाकर मोदी सरकार ने बड़े-बड़े दावे किए थे कि रेलवे को एक कुशल प्रशासक मिल गया है। उसके दिन बहुर जाएंगे। मगर अफसोस के साथ कहना पड़ता है कि रेलवे की हालत रत्ती भर भी नहीं बदली है, बल्कि और बदतर हुई है। अब तो नई दिल्ली-पटना के बीच में चलने वाली संपूर्ण क्रांति जैसी रेलवे बोर्ड की गाड़ियां भी घंटों-घंटों तक देर होने लगी हैं। ऐसा पहले मुश्किल से होता था। इसी तरह, अब आपको सामान्य दिनों में भी आरक्षण आसानी से नहीं मिलता। टिकट खिड़की खुलते ही चंद सेकंडों में वेटिंग लिस्ट शुरू हो जाती है। रेल मंत्रालय रोज-रोज नए-नए नियम बनाता है और स्थिति पहले से भी बदतर हो जाती है। इससे तो लाख दर्जा अच्छा रेल मंत्रालय लालू यादव ने चलाया था। उनके कार्यकाल में कम से कम आरक्षण की परेशानी लोगों को नहीं उठानी पड़ती थी। मोदी सरकार सिर्फ गाल बजाना जानती है, काम तो पहले ही जैसे हो रहे हैं, बल्कि बिगडे़ ही हैं।
अवधेश सिंह, न्यू पुनाईचक, पटना -23

बुजुर्गों की दुर्दशा
दक्षिणी दिल्ली की रंगपुरी पहाड़ी पर स्थित गुरुकुल आश्रम की जिस दशा से ‘हिन्दुस्तान’ ने दिल्ली और देश की जनता को रूबरू कराया, वह प्रशंसनीय है। लेकिन दिल्ली की केजरीवाल सरकार की निष्ठुरता देखकर मन को बहुत दुख हुआ। इस आश्रम द्वारा कई बार गुहार लगाने के बाद भी दिल्ली सरकार ने कोई मदद नहीं की और 200 बुजुर्गों को तपती गरमी में बिना पानी के टिन की छत तले मरने को छोड़ दिया। सर्दियों के मौसम में रैन बसेरों पर सरकार जब करोड़ों रुपये खर्च कर सकती हैै, तो क्या इस भयंकर गरमी में बुजुर्गों की जीवन रक्षा के लिए कोई कदम नहीं उठा सकती? क्या सरकार में आने के बाद व्यक्ति में मानवता समाप्त हो जाती है? यदि नहीं, तो मुख्यमंत्री केजरीवाल को तुरंत इस खबर पर संज्ञान लेकर इस आश्रम की मदद करनी चाहिए।
राजेश गोयल, महरौली, नई दिल्ली

बिहार में केजरीवाल
बिहार विधानसभा चुनाव सिर पर है और जनता पुराने चेहरों और पार्टियों को पहले ही अच्छी तरह आजमा चुकी है। इसलिए अब वह नए चेहरों और पार्टियों को आजमाने के लिए लालायित है। दिल्ली में दोहरा प्रयोग पहले ही हो चुका है। यदि अब केजरीवाल की आम आदमी पार्टी अच्छी तरह संभलकर और संगठित होकर पारदर्शी व लोकतांत्रिक तरीके से त्याग-तपस्या के रास्ते वीआईपी कल्चर से दूर रहकर चलती है, तो निश्चित ही वह बिहार विधानसभा चुनाव में भी अच्छा प्रदर्शन कर सकती है, क्योंकि साम्यवादियों का सहयोग उसके साथ दिखता है।
वेद मामूरपुर, नरेला

वर्षा जल का लाभ उठाएं
देश भीषण जल संकट की ओर बढ़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र ने भी इस बात पर मुहर लगा दी है कि वर्ष 2025 तक देश में जल-त्रासदी उत्पन्न होगी। एक तरफ उच्च तापमान से पूरा देश उबल रहा है, तो दूसरी तरफ गहराता जल संकट प्राणियों के जीवन पर पूर्णविराम लगाने को उतावला है। विडंबना यह है कि जल संरक्षण के तमाम तरीके केवल कागजों पर सिमट जाते हैं। शुद्ध पेयजल की अनुपलब्धता और संबंधित समस्याओं को जानने के बावजूद देश की बड़ी आबादी जल संरक्षण के प्रति सचेत नहीं है। आज भी शहरों में फर्श चमकाने, गाड़ी धोने और गैर-जरूरी कार्यों में साफ पानी को निर्ममतापूर्वक बहाया जाता है। पढ़े-लिखे लोग भी अपने दायित्व से बेपरवाह नजर आते हैं। देश के विभिन्न भागों से जलस्रोतों के सूखने की खबरें आ रही हैं, तो कुछ जगहों से लोगों के दूषित जल पीने की विवशता की। ये खबरें देशवासियों को बेचैन करती हैं। फिर भी यह स्थिति है। अभी मानसूनी वर्षा का समय है। इस वर्षा जल की बूंदों को संरक्षित करने के हरसंभव प्रयास किए जाने चाहिए। यह सुखद भविष्य के लिए जरूरी है।
सुधीर कुमार, राजाभीठा, गोड्डा

 

 

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