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भविष्य के निर्माता

बच्चे भविष्य के निर्माता होते हैं। लेकिन तब क्या हो, जब इन कर्णधारों का भविष्य ही अंधकार में हो? भारत में लापता बच्चों की संख्या लाखों में है। लेकिन सरकार से लेकर प्रशासन तक बेपरवाह हैं। गृह मंत्रालय के अनुसार, साल 2014 में लापता बच्चों की संख्या 68,000 के आसपास थी। इनमें 63 फीसदी लड़कियां हैं। भारत में हर आठ मिनट में एक बच्चा तस्करी का शिकार हो जाता है। पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और दिल्ली में लापता बच्चों की संख्या सबसे अधिक है। मानवता के खिलाफ इस जघन्य अपराध की जड़ें गहराई में हैं। एशिया में भारत को मानव तस्करी का गढ़ माना जाता है। तस्करी के शिकार बच्चों का यौन-शोषण किया जाता है, उनसे बाल-मजदूरी कराई जाती है और उनके अंगों की तस्करी की जाती है। बच्चों के प्रति अपराध पर सर्वोच्च न्यायालय तक चिंता जाहिर कर चुका है। साल 2013 में सर्वोच्च न्यायालय ने 1.7 लाख गुम बच्चों की संख्या और उसके प्रति सरकार की बेरुखी के चलते प्रतिक्रिया दी थी कि ‘यह विडंबना ही है कि किसी को गायब होते बच्चों की फिक्र ही नहीं है।’
दीपक ओझा, भिंड, मध्य प्रदेश

आप की फजीहत
दिल्ली सरकार में मंत्री पद पर रहते हुए जितेंद्र सिंह तोमर को फर्जी डिग्री रखने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया। तोमर ने जिन यूनिवर्सिटियों से डिग्री लेने का दावा किया है, उन्होंने कोई भी डिग्री देने से इनकार कर दिया। अब तोमर कह रहे हैं कि वह इसे हाईकोर्ट में साबित कर देंगे। कैसा विचित्र और हास्यास्पद तर्क है ये! जहां से आपने डिग्रियां लीं, वही संस्थान इससे इनकार कर रहे हैं, तो फिर कोर्ट में क्या साबित होगा? दरअसल, यह महानुभाव कानून व्यवस्था का मखौल उड़ा रहे हैं। इसके अलावा, दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के अनुसार, इस गिरफ्तारी से दिल्ली में इमरजेंसी जैसे हालात पैदा हो गए। एक तो चोरी, ऊपर से सीनाजोरी? भष्टाचार-मुक्त सरकार देने का दावा करने वाली आम आदमी सरकार की इतनी जल्दी बखिया उधड़ जाएगी, किसी ने यह सोचा न था।
सतप्रकाश सनोठिया, रोहिणी

जल के बगैर
जल के बिना जीवन की कल्पना अधूरी है। हम सब जानते हैं कि हमारे लिए जल कितना महत्वपूर्ण है। तेज गरमी के चलते लोग एक-एक बूंद के लिए तरस रहे हैं। लेकिन ये बातें हम तब भूल जाते हैं, जब अपनी टंकी के सामने मुंह धोते हुए पानी को बरबाद करते हैं, जब हम कई लीटर मूल्यवान पानी अपनी कीमती कार धोने में खर्च कर देते हैं। आज पूरी दुनिया के सामने पीने के पानी की समस्या उत्पन्न हो गई है। पृथ्वी पर तीन-चौथाई पानी होने के बाद भी पीने योग्य पानी एक सीमित मात्रा में है। उस सीमित मात्रा के पानी का हम अंधाधुंध दोहन कर रहे हैं। नदियों, तालाबों और झरनों को पहले ही हम केमिकल की भेंट चढ़ा चुके हैं। प्रकृति के खजाने से हम जितना पानी लेते हैं, उसे वापस भी हमें लौटाना है। हम स्वयं पानी का निर्माण नहीं कर सकते, इसलिए प्राकृतिक संसाधनों को दूषित न होने दें और पानी को व्यर्थ न गंवाएं।
हिमांशु मित्तल गुप्ता, अलीगढ़

सरकार या सर्कस
एक बात तो है कि अरविंद केजरीवाल हार मानने वालों में से नहीं हैं। जब से वह दिल्ली के मुख्यमंत्री बने हैं, तब से ही उनकी पार्टी कोई न कोई कारनामा करती आ रही है। आखिर वह सरकार चला रहे हैं या कोई सर्कस? अब जब उनके एक मंत्री को फर्जी डिग्री के कारण जेल जाना पड़ा है, तो वह फिर से धरने पर बैठने का मन बना रहे हैं। मैं तो उनसे यही कहना चाहूंगा कि जो आम आदमी का चेहरा दिखाकर आप वोट मांग रहे थे, उसी चेहरे के साथ दिल्ली का हालत सुधारिए। ये रोज-रोज की नाटकबाजी बंद कीजिए और अपने वादे पूरे करें।
अमन तिवारी

 

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