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बिहार में घमासान

आर्थिक रूप से कमजोर होने के बावजूद बिहार में सबसे अधिक ‘राजनीतिक चेतना’ पाई जाती है। हम यह भी कह सकते हैं कि बिहार के पानी में ही राजनीति के तत्व पाए जाते हैं। इतिहास में मगध के नाम से प्रचलित बिहार और पाटलिपुत्र के नाम से जानी जाने वाली उसकी राजधानी अब पटना के नाम से सुशोभित है। बिहार में इस साल चुनाव होने वाले हैं। सभी राजनीतिक पार्टियां अपने सामाजिक, राजनीतिक व आर्थिक समीकरण साधने में जुट गई हैं। बिहार का चुनावी घमासान काफी दिलचस्प होता है। इस बार तो ‘जंगलराज’ और ‘सुशासन’ दोनों मिले लग रहे हैं। 243 सीटों वाली बिहार विधानसभा में बहुमत का जादुई आंकड़ा 122 सीटों का है। बिहार के विधानसभा चुनाव में इस बार भाजपा का भी भविष्य तय हो जाना है। मोदी लहर के, जिसकी दिल्ली में हवा निकल गई थी, प्रभाव का भी पता चल जाएगा। इस देश में बिहार और उत्तर प्रदेश बड़े ही हरफनमौला राज्य हैं। यहां पर राजनीतिक पार्टियां चुनाव जीतने के लिए साम, दाम, दंड, भेद सभी पैंतरे आजमा लेती हैं। लोकसभा चुनाव की तरह, अगर बिहार के लोगों ने भी जातिवादी राजनीति को नकारा, तो इसका फायदा भाजपा को मिलेगा। 
चमन मिश्रा

केजरीवाल की चुनौती
दिल्ली में उप-राज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है। केंद्र की अधिसूचना के बावजूद, केजरीवाल ने हाईकोर्ट के फैसले के बाद अफसरों का तबादला किया, लेकिन इन वजहों से केंद्र से बढ़ते तनाव के बीच आम आदमी पार्टी की चुनौतियां और गंभीर व गहरी हो चली हैं। यहां केजरीवाल ने मोदी से लेकर एलजी तक को ललकारा है, लेकिन वह भूल रहे हैं कि दिल्ली को अभी पूर्ण राज्य का दर्जा हासिल नहीं है। ऐसे में, केंद्र से टकराहट विकट सांविधानिक संकट में तब्दील हो सकती है, जो केजरीवाल और आप सरकार, दोनों के लिए आत्मघाती सिद्ध हो सकती है।
रमेश सिन्हा, गुड़गांव

क्यों चाहिए सलाहकार
टीम इंडिया के लिए जो सलाहकार मंडल बनाया गया है, उसके सभी तीनों सदस्य देश ही नहीं, दुनिया के महानतम क्रिकेटरों में शुमार किए जाते हैं। इस दौर क्या, किसी भी दौर में सचिन, गांगुली और लक्ष्मण महानतम बल्लेबाज ही गिने जाएंगे। इन तीनों को टीम इंडिया से जोड़कर बीसीसीआई ने टीम के मनोबल को बढ़ाने का काम किया है। ये तीनों इतने पेशेवर खिलाड़ी हैं कि तरकश से इनके तीर कभी खाली नहीं जाएंगे। जहां गांगुली से कप्तानी और आक्रामकता के गुर सीखे जा सकते हैं, वहीं लक्ष्मण से कलात्मक बल्लेबाजी सीखी जा सकती है। और रही बात सचिन तेंदुलकर की, तो उनसे तो जितना भी सिखा जाए, वह कम ही होगा।
दीपक कुमार, खानपुर, दिल्ली

आरोप-प्रत्यारोप
दिल्ली की जनता ने बदलाव के लिए आम आदमी पार्टी को वोट दिया था और सोचा था कि उसका भविष्य अब कुछ सुधरेगा। लेकिन उप-राज्यपाल नजीब जंग और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की मूंछ की लड़ाई में जनता का हाल बेहाल है। हमें तो लगता है कि केजरीवाल जी अपने वादे पूरे करने में असमर्थ हो रहे हैं और जनता का ध्यान बंटाने की कोशिश कर रहे हैं। केजरीवाल केंद्र से भी दो-दो हाथ करने पर आमादा हैं। कोई केजरीवाल को समझाए कि यदि आप दोनों से ही लड़ाई कर लेंगे, तो दिल्ली की जनता की भलाई की नीतियां बनाने के लिए कहां से कानून पास कराएंगे? यदि वह कानून बना भी लेते हैं, तो उसको लागू करने के लिए बिना केंद्र की सहायता से पैसे कहां से लाएंगे? हमें तो दाल में कुछ काला लग रहा है। ऐसा लगता है, जैसे क्रिकेट में कोई बल्लेबाज हिट विकेट होने की पुरजोर कोशिश कर रहा है, ताकि बाद में जनता को कोई जवाब न देना पड़े।
राजेश कुमार

 

 

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