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मैगी में मिलावट

मैगी में सीसे का पाया जाना क्षुब्ध कर गया उन मासूम बच्चों को, जो बड़े चाव से मैगी खाया करते थे। अपितु कुछ बच्चे तो अभी मिलावट का मतलब भी नहीं समझते। वैसे, यह दुखद है कि खाने-पीने के सामान में मिलावट हो रही है। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि हर चीज मिलावटी ही होगी। आखिर हम कहां जाएं? किस पर भरोसा करें? विश्लेषणों पर गौर करें, तो मैगी जैसे फास्ट फूड को वैसे भी हेल्दी नहीं माना जाता। वह बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास में किसी प्रकार की कोई भूमिका नहीं अदा करती। फिर भी पता नहीं क्यों, हम इस प्रकार के खाद्य पदार्थों पर इतने निर्भर हो गए हैं? कामकाजी महिलाओं के लिए बच्चों के जलपान का एकमात्र विकल्प शायद मैगी ही हो गया था। बहरहाल, मिलावट की आई इस खबर के बाद तमाम वर्गों को चेतने की जरूरत है। जरूरी यह है कि अपने बच्चों को हानिकारक और पोषणरहित खाद्य सामग्री के नुकसान से अवगत कराएं। साथ ही, उनके पौष्टिक खाने की व्यवस्था करें।
कजरी मानसी ऐश्वर्यम, गुड़गांव

काले धन का सवाल
देश में छह दशक तक शासन करने वाली कांग्रेस और दूसरी पार्टियां, जैसे कि समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, वगैरह एक वर्ष पुरानी मोदी सरकार से पूछ रही है कि विदेश में जमा धन वापस कब आएगा? विदेश में जमा धन काला है या सफेद यह तो रहस्य ही है, लेकिन इतना अवश्य है कि जो लोग कांग्रेस के पक्ष में नारे लगाते थे, वे बताएं कि जिस धन को वापस लाने की मांग के साथ मोदी सरकार को कोसा जा रहा है, वह धन किसकी सरकार में विदेश गया? कैसे गया और कितना गया और किसका गया? प्रेस वार्ता करके कांग्रेसी नेता यह पूछ रहे हैं कि अच्छे दिन कब आएंगे, तो वही देखें कि अच्छे दिन और क्या होंगे?
मनोज दुबलिश, मेरठ

हॉर्न के नुकसान
दिल्ली की सड़कों पर अचानक प्रेशर हॉर्न का प्रयोग अधिक और निर्बाध रूप से देखने को मिल रहा है। प्रेशर हॉर्न के अलावा, कुछ भयभीत करने वाले भोंपुओं का प्रयोग भी आज फैशन-सा बन गया है। विशेष यातायात आयुक्त, मुझे क्षमा करेंगे अगर मैं यह कहूं कि इस तरह के भोंपू के खिलाफ ट्रैफिक पुलिस द्वारा शायद ही कभी कोई कार्रवाई होती हो। बुलेट मोटर साइकिल तो इसके बिना 'बुलेट' ही नहीं कही जा सकती और बुलेट चालक को तो जैसे हेलमेट न पहनने का विशेषाधिकार मिला हुआ है। नए व आधुनिक स्कूटर या स्कूटी में तो और भी डरावने किस्म के भोंपू लगे हुए हैं, जो बेहद खतरनाक हैं। दोपहिया वाहनों में ही क्या, बड़ी-छोटी कारों में भी कानफाड़ू हॉर्न हैं, जिनसे दुर्घटना घटने की आशंका बनी रहती है। ऐसे भोंपू दिल्ली में आए दिन हो रही रोड रेज की घटनाओं के लिए भी काफी हद तक जिम्मेदार हैं। ब्लड प्रेशर, हृदय रोगियों और गर्भवती महिलाओं के लिए भी ये बेहद खतरनाक हैं।
एस पी गोयल

वादे निभाएं मोदी
देश के करोड़ों लोगों को यह गर्व है कि वे भारत जैसे महान देश में पैदा हुए। लेकिन यह दुर्भाग्य की बात है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विदेशी जमीन पर भारत और भारतवासियों का यह कहकर अपमान करा रहे हैं कि पहले भारतीय लोगों को बहुत शर्म आती थी कि वे यहां पैदा हुए हैं। प्रधानमंत्री के इस बयान से विदेश एवं देश में भारतीयों का बड़ा अपमान हुआ है। नरेंद्र मोदी सत्ता हासिल करने के एक साल के अंदर देश के उत्थान से जुड़ा कोई बड़ा काम तो कर न सके, लेकिन देशवासियों को नीचा दिखाने की व्यर्थ चेष्टाएं करते दिखते रहे हैं। उन्हें यह सब छोड़कर उन वादों पर ध्यान देना चाहिए, जो उन्होंने देश की जनता से किए थे। उनको कहा था कि वह शासक नहीं, सेवक बनेंगे। अब उन्हें अपने काम में लग जाना चाहिए, तभी जनता के बीच उनकी छवि बनी रहेगी।
नेमीचंद छाबड़ा, टोंक रोड, जयपुर

 

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