DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

दूरगामी योजना

पिछले दिनों दाल की कीमतों में भारी इजाफा हुआ। इससे आम जनता अभी उबर भी नहीं पाई थी कि राम विलास पासवान का यह बयान आ गया कि दालों की 2,80,000 टन की आवश्यकता के आगे इस बार मात्र 1,70,000 टन की पैदावार हुई है। यह आंकड़ा विचलित करने लगा है। साल-दर-साल स्थिति और बिगड़ सकती है, क्योंकि जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग का असर लाजिमी है। पर यदि दूरगामी सोच दिखाई जाए, तो परेशानी से बचा जा सकता है। हमारी सरकार भारत-अफ्रीका विकास का एक मसौदा तैयार कर सकती है, और अफ्रीकी देशों से, जैसे कि तंजानिया आदि में दालों की खेती की जाती है, करार कर सकती है। इससे न सिर्फ हम दालों की आपूर्ति और कीमतों पर नियंत्रण रख सकते हैं, बल्कि अफ्रीकी देशों को आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाने में भारत एक अहम भूमिका भी निभा सकता है
संदीप बक्शी
स्प्रिंगफील्ड कॉलोनी, फरीदाबाद

पाकिस्तान की धमकी
पाकिस्तान ऐसा मुल्क है, जिसके पास परमाणु बम तो है, लेकिन उसे सहेजने और उसके सही इस्तेमाल की समझ नहीं है। यह वह मुल्क है, जिसने कालाबाजारी से तकनीक और यूरेनियम हासिल करके परमाणु बम तो बना लिया, पर उससे होने वाले विनाश की गंभीरता से वह नावाकिफ है। वह हमें अक्सर परमाणु हमले की धमकी देता रहता है। अभी हाल में ही नई दिल्ली को निशाना बनाने की बात उसने कही। मगर सऊदी अरब और ईरान के बीच छिड़े विवाद में कूदते हुए उसने कहा है कि वह ईरान का नामोनिशां मिटा देगा। एक सेनाध्यक्ष अगर अपने पड़ोसी देश को ऐसी धमकी देगा, तो मतलब साफ है कि पाकिस्तान अपनी परमाणु ताकत पर न सिर्फ इतरा रहा है, बल्कि उसके बल पर धमका भी रहा है। कहीं इस तरह की चाल खुद उसी पर न भारी पड़ जाए?
शुभम कुमार प्रजापति, रुड़की, हरिद्वार

देश कितना बदला है
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बहुत उम्मीद है कि वह अपनी महत्वपूर्ण योजनाओं में हमारे जैसे बेरोजगार नौजवानों के लिए रोजगार और कुछ आय की व्यवस्था करेंगे, मगर अभी तक वैसा कुछ नहीं होता दिख रहा है। योजना तो उन्होंने बहुत बनाए, लेकिन उसका लाभ अभी तक सही लोगों के पास नहीं पहुंच रहा है। जरूरी यही है कि योजना का लाभ सभी को मिले।
रमेश कुमार माइती, चास, बोकारो

अपने मुंह मियां मिट्ठू
दो वर्ष के कार्यकाल की तारीफ के पुल बांधते हुए केंद्र सरकार के बड़े-बड़े विज्ञापन 'अपने मुंह मियां मिट्ठू' लगे। यह समझने वाली बात है कि सरकार अच्छा काम करेगी, तो जनता के 'अच्छे दिन' आएंगे, जिससे सरकार के भी 'अच्छे दिन आना' स्वाभाविक है। ठीक वैसे ही, अगर कांग्रेस अच्छेे काम करती, जनता की बातों पर गौर करती और घोटाले-दर-घोटाले न कर अपनी छवि साफ-सुथरी रखती, तो उसके अच्छे दिन बने रहते।
शकुंतला महेश नेनावा
इंदौर, मध्य प्रदेश

हमारी अधूरी उम्मीदें
अभी कुछ दिन पूर्व प्रधानमंत्री जी का सहारनपुर आना हुआ था, यह बहुत खुशी की बात थी। लेकिन जो उम्मीदें लोगों ने उनसे लगा रखी थीं, वे पूरी नहीं हुईं। 'विकास पर्व' नामक प्रस्तुत कार्यक्रम पर गौर किया जाए, तो उनकी नजर से कार्यक्रम पूरी तरह सफल कहा जाएगा, क्योंकि प्रस्तुत कार्यक्रम के दिन मौसम बहुत अच्छा रहा, कार्यक्रम का संचालन भी उत्कर्ष था और लोगों का जोश काफी दिखा व उनकी संख्या भी भरपूर रही। मगर सहारनपुरवासियों की नजर से देखें, तो प्रधानमंत्री जी के भाषण में कोई भी ऐसी बात नहीं कही गई, जो खासतौर से सहारनपुरवासियों व आसपास के लोगों के लिए हो। हमने बस वही सुना, जो टीवी में सुनते और अखबारों में पढ़ते आए हैं। पहली बार प्रधानमंत्री जी सहारनपुर आए थे, तो उन्हें यहां की बदहाली देखकर कुछ पैकेज की घोषणा करनी चाहिए थी।
विवेक भारद्वाज, सहारनपुर

 

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:lentils price rise