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सेवा कर के नाम पर लूट

केंद्र सरकार सेवा कर के नाम पर जनता को लूट रही है। पहले ही सेवा कर बहुत ज्यादा था, उस पर आधा-आधा प्रतिशत दो बार बढ़ाकर इसे 15 प्रतिशत कर दिया गया है। यह जनता के साथ धोखा है। सेवा कर ज्यादा से ज्यादा सात-आठ प्रतिशत होना चाहिए, लेकिन वर्तमान दर तो आय कर को भी मात दे रही है। सेवा कर की दोहरी मार सबसे ज्यादा आयकर दाताओं पर ही पड़ती है, क्योंकि वही सेवाओं का उपयोग सबसे ज्यादा करते हैं। यदि सरकार को अपनी आमदनी बढ़ानी ही है, तो वह अधिक से अधिक लोगों को आय कर के दायरे में क्यों नहीं लाती? आखिर कहां जा रहे हैं कोयला, दूरसंचार और तेल व गैस के लाभ? क्यों की जा रही है विज्ञापनों पर अंधाधुंध पैसे की बर्बादी? क्या जनता मेहनत करके धन इसलिए कमाती है कि उसका एक बड़ा भाग वह उड़ाने के लिए सरकार को दे दे?
यश वीर आर्य
aryayv@gmail.com

शिक्षा को तो बख्श दें
राज्य सरकारों द्वारा स्कूली पाठ्यक्रमों में की जा रही छेड़छाड़ को लेकर टेलीविजन पत्रकार अनंत विजय के लेख से सहमत हुआ जा सकता है। देश के कई राज्यों के स्कूली पाठ्यक्रमों में ऊल-जुलूल परिवर्तनों की एक लहर-सी चल पड़ी है, जिसका खामियाजा आखिरकार हमारे स्कूलों में तैयार हो रही पीढ़ी को भुगतना पड़ेगा। येे परिवर्तन मानसिक या शारीरिक शिक्षा की जरूरतों के आधार पर न होकर किसी विशेष विचारधारा से प्रेरित प्रतीत होते हैं। 'शिक्षा का तात्पर्य मनुष्य के सर्वांगीण विकास से है', लेकिन परिवर्तित हो रहे पाठ्यक्रम ऐसी किसी भावना से प्रेरित नहीं लगते, बल्कि इतिहास को बदलकर बच्चों को किसी विशेष विचारधारा से ग्रसित किया जा रहा है। यदि स्कूली पाठ्यक्रमों मेें बदलाव की आवश्यकता है, तो वह इस तरह से होना चाहिए कि बच्चों को केवल किताबी ज्ञान देकर रटंत विद्यार्थी न बनाया जाए, बल्कि पाठ्यक्रम को व्यावहारिक रूप से पूर्ण बनाया जाए, जिसका प्रयोग बच्चे अपने जीवन में कर सकें और आने वाले समय में अपने लिए आसानी से रोजगार के साधन जुटा सकें।
संदीप उनियाल, देहरादून
sandeepuniyal811@gmail.com

एक और टैक्स
वर्तमान केंद्र की सरकार के काम का तो पता नहीं, मगर वह मध्यम वर्ग पर तरह-तरह के टैक्स लगाकर उसकी कमर जरूर तोड़ रही है। जहां पिछली सरकार में सर्विस टैक्स की दर 12 प्रतिशत थी, वहीं अब यह बढ़कर 15 प्रतिशत हो गई है। पहले स्वच्छ भारत टैक्स और अब कृषि कल्याण टैक्स। आखिर सरकार क्या करके मानेगी? यह ठीक है कि किसानों का विकास होना चाहिए, लेकिन इस तरह से टैक्स लगाकर नहीं। उसके लिए कोई और तरीका सरकार को खोजना चाहिए था, लेकिन सरकार उसमें विफल रही व जनता पर एक और टैक्स रूपी बोझ डाल दिया। एक तरफ, जहां वर्तमान सरकार पिछली सरकार की तुलना में तनख्वाह और डीए आदि में कम इजाफा कर रही है, वहीं दूसरी ओर इस तरह के टैक्स लगा रही है। सरकार को इस विषय में विचार करना होगा।
विंध्या वशिष्ठ, दिल्ली
vindhyavashisth@gmail.com

दोहरे कर की सच्चाई
यूपी सरकार ई-कॉमर्स व्यापार पर पांच प्रतिशत अतिरिक्त टैक्स थोपकर यूपी की जनता पर दोहरे कर का बोझ डालने जा रही है। ई-कॉमर्स व्यापार पर कोई बिक्री कर और वैट की चोरी नहीं होती है, क्योंकि ई-व्यापर करने वाली कंपनियां पैकेट पर सामान का मूल्य और उस पर लगाए गए टैक्स का पूरा विवरण चस्पां करके ही गंतव्य पर भेजने की पूर्ण पारदर्शी प्रक्रिया अपनाती हैं। दो वर्षों में मोदी सरकार ने भी सर्विस टैक्स में लगातार वृद्धि करके आम लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है, वहीं अब यूपी सरकार ई-कॉमर्स व्यापार पर पांच प्रतिशत अतिरिक्त टैक्स का बोझ लादकर जनता को महंंगाई में झोंक रही है।
रचना रस्तोगी
वेस्टर्न कचहरी रोड, मेरठ
rachnarastogi66@gmail.com

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  • Web Title:government service tax income