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और कितने वेमुला

आंध्र प्रदेश के हैदराबाद विश्वविद्यालय के छात्र रोहित वेमुला की चिट्ठी एक पत्थर दिल इंसान को भी पिघला सकती है। खुदकुशी करने के पहले लिखे गए पत्र में वेमुला की बेबसी साफ-साफ पढ़ी जा सकती है। आखिर क्यों गरीब, दलित परिवार के चार बच्चों के साथ नाइंसाफी होती रही और विश्वविद्यालय व जिला प्रशासन उनसे मंुंह फेरे रहा? यूनिवर्सिटी प्रशासन पर तो खैर आरोप ही है, मगर जिला प्रशासन क्यों तमाशाई बना रहा? समाज और मीडिया के लोग क्यों नहीं इन छात्रों की मदद के लिए आगे आए? असल में, हम एक ऐसे काल-खंड में जी रहे हैं, जिसमें इंसानियत की परिभाषा सिर्फ अपने से जुड़े मामलों से तय होने लगी है। वेमुला दलित परिवार के न भी होते और किसी गरीब खानदान के ही होते, तब भी उनकी यही नियति होती। हमारे देश में सामाजिक-आर्थिक कमजोरों और सामर्थ्यवानों के साथ दोहरा व्यवहार होता है। न जाने और कितने वेमुला अभी इसका शिकार बनेंगे।
आदित्य प्रताप सिंह
फ्रेजर रोड, पटना- 01  

नशाखोरी और पंजाब
पंजाब में हर साल पाकिस्तान से हजारों करोड़ रुपये की नशीली चीजें तस्करी के जरिए आती हैं। उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई भी इस कृत्य में लिप्त है। तस्करी के जरिये आने वाली इन मादक वस्तुओं में हेरोइन सबसे ज्यादा होती है, जिसकी लगभग पूरी खपत सिर्फ पंजाब में होती है। माना जा रहा है कि पठानकोट एयरबेस पर अटैक को अंजाम देने वाले आतंकियों ने घुसपैठ के लिए ड्रग तस्करों के नेटवर्क का ही इस्तेमाल किया था। सवाल यह है कि सब कुछ जानते हुए भी भारत-पाक सीमा की सुरक्षा और नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने के मामले में ढील क्यों बरती जा रही है? केंद्र सरकार इसके प्रति गंभीर क्यों नहीं है? जब तक केंद्र सरकार ड्रग्स तस्करी को रोकने के लिए सक्रिय नहीं होगी, तब तक इसे रोकना संभव नहीं है।
अनिल कुमार माहुरे
बमरौली कटारा, आगरा

जानलेवा सेल्फी
एक खबर के अनुसार, ओंकारेश्वर में नर्मदा के किनारे सेल्फी लेते समय पैर फिसलने से युवक नदी में गिर गया और उसे बचाने में उसका भाई भी डूब गया। इसके पहले भी पीछे से आती ट्रेन के साथ सेल्फी लेते समय इंजन से टकराने के कारण एक युवक की मौत हो गई थी। खतरनाक तरीके से सेल्फी लेने के और कई किस्से अक्सर अखबारों और टीवी चैनलों के जरिए पढ़ने, सुनने और देखने में आते रहते हैं। सेल्फी के शौकीनों को इस तरह के खतरनाक शौक से तौबा करनी चाहिए और 'सेल्फी-शौक' को पूरा करने के लिए 'सेफ' मोड अपनाना चाहिए, ताकि उनकी 'सेल्फी' सेफ रहे और वह जानलेवा न बन सके।
शकुंतला महेश नेनावा
इंदौर, मध्य प्रदेश

धन की बर्बादी
सरकारों की अदूरदर्शिता के कारण आम जनता के पैसे की बर्बादी कब तक होती रहेगी, इस पर अब पूरी गंभीरता से सोचने की जरूरत है। एक तरफ तो सफाई कर्मियों, शिक्षकों को अपने वेतन के लिए और बुजुर्गों, विकलांगों और विधवाओं को पेंशन पाने के लिए धरना-प्रदर्शन करने पड़ रहे हैं, और दूसरी ओर खबर यह आ रही है कि वर्ष 2008 में लगभग 150 करोड़ रुपये की लागत से शीला दीक्षित सरकार ने जो बीआरटी कॉरिडोर बनवाया था, उसे तोड़ने पर लगभग 12 करोड़ रुपये की राशि खर्च होगी। कॉरिडोर निर्माण के पहले ही इस योजना पर अगर क्षेत्र के निवासियों से विचार-विमर्श कर लिया गया होता, तो न इतना सामान बेकार जाता और न ही 162 करोड़ रुपये की रकम की बर्बादी होती। जब इतना बड़ा आर्थिक नुकसान होता है, तो किसी भी कार्य को करने से पहले ही गंभीरता से विचार करना जनहितकारी  है। ऐसे गलत कार्यों पर खर्च रकम की भरपायी संबंधित सरकार के मंत्रियों और पार्टी फंड से की जानी चाहिए, ताकि शासन में बैठे नेता अपनी मनमानी और तानाशाही न कर सकें।
महेंद्र मान
अलीपुर, दिल्ली

 

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