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अलविदा नीलाभ अश्क! मशहूर कवि व अनुवादक नहीं रहे

अलविदा नीलाभ अश्क! मशहूर कवि व अनुवादक नहीं रहे

प्रख्यात साहित्यकार उपेंद्र नाथ अश्क के पुत्र और मशहूर कवि नीलाभ अश्क का शनिवार सुबह दिल्ली स्थित आवास पर निधन हो गया। वे 70 वर्ष के थे। शनिवार दोपहर बाद दिल्ली के निगम बोध घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। 

नीलाभ हिन्दी के श्रेष्ठ अनुवादक थे। उनका मूल घर भले ही जालंधर में था और जन्म मुम्बई में हुआ लेकिन कर्मस्थली इलाहाबाद रहा। जीवन भर सत्ता के शोषण के खिलाफ लिखने वाले योद्धा कवि के निधन से हिन्दी जगत में शोक की लहर छा गई। तीनों लेखक संगठनों प्रलेस, जलेस और जसम ने नीलाभ के निधन को हिन्दी की बड़ी क्षति बताया है।

16 अगस्त 1945 को जन्मे नीलाभ ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एमए की डिग्री ली थी। आजीविका के लिए शुरू में प्रकाशन का काम किया। 1980 में उन्होंने बीबीसी ज्वाइन की और चार साल तक विदेश प्रसारण सेवा में प्रोड्यूसर रहे। 1984 में वहां से लौटने के बाद उन्होंने इलाहाबाद को अपना कार्यक्षेत्र बनाया और पूरी तरह से लेखन पर निर्भर रहे। नीलाभ प्रकाशन का काम भी साथ-साथ चलता रहा। छह साल पहले वह दिल्ली चले गए और वहीं रहने लगे। 

जंगल खामोश है, उत्तराधिकार, चीज़ें उपस्थित हैं, शब्दों से नाता अटूट है, शोक का सुख, ख़तरा अगले मोड़ की उस तरफ़ है और ईश्वर को मोक्ष जैसी कविता संग्रहों के अलावा उन्होंने अनुवाद के क्षेत्र में उम्दा कार्य किया। अरुंधति राय के बुकर विजेता उपन्यास 'गॉड ऑफ़ स्मॉल थिंग्स' का हिंदी अनुवाद 'मामूली चीजों का देवता' बहुत प्रसिद्ध हुआ। रंगमंच, टेलीविजन, रेडियो, पत्रकारिता, फिल्मों में उनकी गहरी दिलचस्पी थी। 
साहित्य जगत की प्रमुख हस्तियों दूधनाथ सिंह, प्रो. राजेन्द्र कुमार, वीएन राय, हरीशचंद्र पांडेय, प्रणय कृष्ण, प्रो. संतोष भदौरिया ने उनके निधन पर गहरा शोक जताया है।

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  • Web Title:glaucous poet neelabh ashk died