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घेंघा को हल्के में न लें

घेघा हो तो इसे हल्के में न लें। यह धीर-धीर डेवलप होकर नेक कैंसर का रूप ले लेता है। इसलिए घेघा और उसके पास गांठ और गिल्टी को नजरअंदाज न करं। ये बातें कनाडा के मनीटोवा विश्वविद्यालय में हेड-नेक सर्विसेज में एसोसिएयट प्रोफसर डा. के ए पाठक ने कहीं। वे सोमवार को इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान में आयोजित थायराएड कैंसर पर आयोजित सीएमएई को संबोधित कर रहे थे। इसका आयोजन क्षेत्रीय कैंसर संस्थान और सोसायटी ऑफ अंकोलॉजी ने संयुक्त रूप से किया था। डा. पाठक ने बताया कि इस बीमारी से दस लाख लोगों में पांच से दस लोग पीड़ित हैं।ड्ढr ड्ढr उन्होंने कहा कि इस बीमारी का इलाज सर्जरी है। सर्जरी के बाद रडिया आयोडिन आई (131) ट्रीटमेंट किया जाता है। डा. पाठक ने कहा कि लेकिन इस ट्रीटमेंट के दौरान मरीा को एक हफ्ते तक अलग वार्ड में रखना होता है। उन्होंने कहा कि इस कैंसर में ठीक होने वाले मरीाों की संख्या अन्य प्रकार के कैंसरों की तुलना में ज्यादा है। चौथे स्टेा में यह बीमारी 60 से 70 फीसदी ठीक हो जाती है, जबकि पहले और दूसर स्टेा में 0 सेीसदी मरीा पूरी तरह ठीक होड्ढr जाते हैं।ड्ढr ड्ढr सीएमई का संचालन करते हुए सोसायटी ऑफ अंकोलॉजी के सचिव डा. आर के गोस्वामी ने कहा कि भारत में इस बीमारी का देर से पता चलता है। इस मौके पर आईाीआईएमएस के निदेशक डा. अरुण कुमार, डा. मिथिलेश कुमार, डा. सुधाकर सिंह, डा. राजीव रांन प्रसाद, डा. एस के शाही और पटना मेडिकल कालेज के पीजी के छात्र मौजूद थे।

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