क्या आप भी बाघ को गोद लेना चाहते हैं? दिल्ली में कहां और कितने रुपयों में मिलेगा ये मौका?
क्या आप भी एनिमल लवर हैं और पशुओं को गोद लेते हैं? अगर हां, तो आपके लिए ये खबर काम की है। दिल्ली में छोटे-मोटे जानवरों के अलावा खूंखार बाघ को भी गोद ले सकते हैं। जी हां, आपने सही पढ़ा। पढ़िए पूरी डिटेल।

क्या आप भी एनिमल लवर हैं? क्या आप पशुओं को गोद लेते हैं? अगर हां, तो आपके लिए ये खबर काम की है। दिल्ली में छोटे-मोटे जानवरों के अलावा खूंखार बाघ को भी गोद ले सकते हैं। जी हां, आपने सही पढ़ा। दिल्ली के लोग अगले महीने से राष्ट्रीय प्राणी उद्यान (नेशनल जुलॉजिकल पार्क) में किसी जानवर को एक दिन के लिए गोद लेकर अपना जन्मदिन, शादी की सालगिरह या अन्य खास मौके मना सकेंगे।
बाघ गोद लेने की 1 दिन की रकम 50000 रुपये
इस योजना के तहत, पशु को गोद लेने वालों को चिड़ियाघर द्वारा निर्धारित लागत वहन करनी होगी, जिसका उपयोग जानवर के भोजन और दैनिक देखभाल के लिए किया जाएगा। चुने गए पैकेज के आधार पर, व्यक्ति को स्मृति चिन्ह के रूप में प्रमाण पत्र और तस्वीरें भी मिलेंगी। पशु को गोद लेने की इस योजना के तहत छोटे जानवरों के लिए शुल्क की शुरूआत 500 रुपये से शुरू होगी। वहीं अगर आप भारी-भरकम खूंखार जानवर यानी बाघ को गोद लेना चाहते हैं, तो एक दिन गोद लेने के लिए आपको 50000 रुपये देने होंगे।
कब तक मंजूरी मिलने की उम्मीद
चिड़ियाघर के निदेशक संजीत कुमार ने कहा कि जानवरों को अल्पकालिक रूप से गोद लेने की व्यवस्था शुरू करने के प्रस्ताव को इस महीने के अंत तक मंजूरी मिलने की संभावना है, जिसके बाद यह पहल मार्च से शुरू की जाएगी। उन्होंने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि एक दिन के लिए गोद लेने की लागत प्रत्येक जानवर की वार्षिक गोद लेने की दर के आधार पर तय की गई है।
अन्य जानवरों के लिए क्या है रेट
कुमार ने कहा, “यदि किसी जानवर को गोद लेने की वार्षिक लागत 50,000 रुपये है, तो उसे एक दिन के लिए गोद लेने का शुल्क लगभग 500 रुपये होगा।” संशोधित दरों के अनुसार, चित्तिदार हिरण को गोद लेने की वार्षिक लागत 18,000 रुपये है, और उसे एक दिन के लिए 500 रुपये में गोद लिया जा सकता है। इसी प्रकार, स्लॉथ बियर को गोद लेने की वार्षिक दर 45,000 रुपये है और उसे भी एक दिन के लिए 500 रुपये में गोद लिया जा सकेगा।
बाघ की सालाना फीस 6 लाख रुपये
कुमार ने बताया कि बाघ को गोद लेने की वार्षिक लागत छह लाख रुपये है, जो एक दिन के लिए लगभग 50,000 रुपये होती है। उन्होंने कहा कि चिड़ियाघर इस योजना को अधिक सुलभ बनाने के लिए अल्पकालिक और ऑनलाइन गोद लेने के विकल्प पेश कर रहा है, जो पहले पूरी तरह से ऑफलाइन थे, खासकर उन व्यक्तियों के लिए जो पूरे वर्ष के लिए किसी जानवर को गोद नहीं ले सकते हैं।
पर्यटकों की संख्या और राजस्व में होगी बढ़ोतरी
अधिकारी ने कहा कि इस पहल से पर्यटकों की संख्या बढ़ाने और अतिरिक्त राजस्व उत्पन्न करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है। साल 2022 में शुरू किए गए पशु को गोद लेने के कार्यक्रम का उद्देश्य पशु संरक्षण को बढ़ावा देना और लोगों का वन्यजीवों के साथ जुड़ाव मजबूत करना है। फिलहाल, चिड़ियाघर एक या दो साल के लिए जानवरों को गोद लेने की अनुमति देता है, जिनमें से अधिकांश कॉर्पोरेट संस्थाएं होती हैं।
कुमार ने कहा, "इस वर्ष भागीदारी में गिरावट देखी गई है, अब तक केवल चार कंपनियां ही आगे आई हैं। इसीलिए हम अधिक व्यक्तियों को आकर्षित करने के लिए प्रक्रिया को अधिक सुलभ बना रहे हैं।"
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Ratan Guptaरतन गुप्ता एक डिजिटल हिंदी जर्नलिस्ट/ कॉन्टेंट प्रोड्यूसर हैं। वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान की स्टेट न्यूज टीम के साथ काम कर रहे हैं। वह क्राइम, राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर न्यूज आर्टिकल और एक्सप्लेनर स्टोरीज लिखते हैं।
रतन गुप्ता वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर स्टेट न्यूज टीम में काम करते हैं। इस टीम में हिंदी पट्टी के 8 राज्यों दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गुजरात से जुड़ी खबरों की कवरेज करते हैं। उनका लेखन खास तौर से क्राइम, राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित रहता है।
लाइव हिंदुस्तान में बीते 2 साल से काम करते हुए रतन ने ब्रेकिंग न्यूज, राजनीतिक घटनाक्रम और कानून-व्यवस्था से जुड़ी खबरों पर लगातार लेखन किया है। इसके साथ ही वह एक्सप्लेनर स्टोरीज लिखने में भी विशेष रुचि रखते हैं, जहां जटिल मुद्दों को सरल और तथ्यपरक भाषा में पाठकों के सामने रखते हैं।
रतन गुप्ता ने बायोलॉजी में ग्रेजुएशन किया है, जिसके बाद उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की है। साइंस बैकग्राउंड होने के कारण उनकी न्यूज और एनालिसिस स्टोरी में साइंटिफिक टेंपरामेंट, लॉजिकल अप्रोच और फैक्ट-बेस्ड सोच साफ दिखाई देती है। वह किसी भी मुद्दे पर रिपोर्टिंग करते समय दोनों पक्षों की बात, मौजूद तथ्यों और आधिकारिक स्रोतों को प्राथमिकता देते हैं, ताकि यूजर तक संतुलित और भरोसेमंद जानकारी पहुंचे।
इसके साथ ही आईआईएमसी की एकेडमिक पढ़ाई ने उन्हें रिपोर्टिंग, न्यूज प्रोडक्शन, मीडिया एथिक्स और पब्लिक अफेयर्स की गहरी समझ दी है। इसका सीधा असर उनके लेखन की विश्वसनीयता और संतुलन में दिखाई देता है।
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