लीकतंत्र का नहीं, अब ये आंदोलन लोकतंत्र का है; प्रदर्शनकारियों के लिए योगेंद्र यादव के 5 संकल्प

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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कॉकरोच जनता पार्टी के संसद मार्च को देखते हुए सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने प्रदर्शनकारियों को पांच संकल्पों का पालन करने को कहा है। सीजेपी का संसद मार्च 20 जुलाई को यानी कल होना है। यादव ने कहा कि अब यह लड़ाई लीकतंत्र का नहीं है, बल्कि लोकतंत्र का हो गया है।

yogendra yadav at cjp protest
yogendra yadav at cjp protest

सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने सीजेपी के प्रदर्शन को संबोधित करते हुए पांच संकल्पों की याद दिलाई। यादव ने कहा कि यह बड़ी लड़ी लड़ाई है। 20 जुलाई को संसद मार्च करते समय हमें पंचशील का पालन करना होगा।

यादव ने इन पांच संकल्पों को कार्यकर्ताओं के सामने रखा-

1. मार्च में सिर्फ एक झंडा होगा तिरंगा। किसी भी पार्टी या संगठन का झंडा नहीं होगा।

2. हाथ में किताब, संविधान, गांधी, अंबेडकर, भगत सिंह या फिर ऐसे ही किसी महान आदमी या औरत का फोटो लेकर चलेंगे और कुछ नहीं।

3. जुबान पर कोई नकारात्मक नारा नहीं आए। वो बुरी हरकत करते हैं तो इसका मतलब यह नहीं कि हम भी करें। आंदोलन करने वालों की डिम्मेदारी डबल है। सिर्फ जय हिंद, भारत माता की जय, इंकलाब जिंदाबाद और जय भीम जैसे नारे लगाएंगे। ये नारे हैं हमारे पास। हमें घटिया नारे लगाने की जरूरत नहीं है। बड़े नारे लगाएंगे, बड़ी सोच रखेंगे और देश को आगे रखेंगे। हम छोटा काम नहीं करेंगे।

4. आचरण और व्यवहार में अनुशासन बरतना होगा। जो मंच से घोषणा की जाए, जो वॉलंटियर्स बताए, उसकी बात को मानेंगे। अगर वॉलंटिय उम्र में छोटा भी है और अनुरोध कर रहा है तो हम उसकी बात मानेंगे।

5. किसी भी हालत में किसी भी तरह की हिंसा बिल्कुल नहीं। योगेंद्र यादव ने कहा कि जब मैं युवा होता था तो हमारा एक नारा होता था। हमला चाहे जैसा भी हो, हाथ हमारा नहीं उठेगा।

योगेंद्र यादव ने प्रदर्शनकारियों से कहा कि आप सबको देखकर इस देश के भविष्य की एक उम्मीद जागती है। अब ये आंदोलन सिर्फ लीकतंत्र का नहीं है, अब ये आंदोलन लोकतंत्र का है। हम यहां पर कायम रहेंगे। अपनी बात को आगे बढ़ाएंगे। जब तक शांतिपूर्ण तरीके से रहेंगे, किसी तरह का प्रोवोकेशन नहीं होने देंगे तो जय आपकी होगी।

उन्होंने प्रदर्शनकारियों से आह्वान किया कि सब तरफ अपना संदेश भेजना शुरू कर दीजिए। जो-जो जहां भी हैं, सबको कहिए कि जंतर-मंतर आइए। अगले दो रात को ठहरिए यहां पर। पुलिस का ऐक्शन रात को ही होगा। उनसे भी मार नहीं करनी है हमको । याद रखिए मारधाड़ से नहीं बस संख्या से, ईमानदारी से, सच्चाई से, न्याय से शांति से हमें आंदोलन करना है। मुझे विश्वास है कि 20 तारीख का मार्च होगा। इस देश में जिस बड़े बदलाव की आप लोगों ने शुरुआत की है, उस मुकाम तक पहुंचेंगे।

Subodh Kumar Mishra

लेखक के बारे में

Subodh Kumar Mishra

सुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।

ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।

शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।

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