पति से 20 हजार रुपए महीना गुजारा भत्ता चाहती थी महिला; कोर्ट ने खारिज की अपील, कही बहुत जरूरी बात
महिला ने अदालत को बताया था कि उसका पति मेडिकल स्टोर चलाता है, साथ ही कृषि और अन्य व्यवसायिक संपत्तियों से भी उसे अतिरिक्त आय होती है। ऐसे में महिला ने दावा किया कि उसका पति 15 से 20 हजार रुपए प्रतिमाह गुजारा भत्ता देने में सक्षम है।

रिपोर्ट- निखिल पाठक
दिल्ली की कड़कड़डूमा अदालत ने एक मामले में फैसला देते हुए कहा कि पति की आर्थिक क्षमता से ज्यादा गुजारा भत्ता देने का आदेश नहीं दिया जा सकता है। अदालत ने माना कि पत्नी को दिया गया भत्ता उसकी बुनियादी जरूरतों के लिए कम हो सकता है, लेकिन गुजारा भत्ता तय करते समय पति की वास्तविक या अनुमानित आय को ध्यान में रखना भी जरूरी है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह की कोर्ट ने यह टिप्पणी एक महिला की अपील खारिज करते हुए की।
इस महिला ने घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत मजिस्ट्रेट की अदालत द्वारा तय किए गए 1840 रुपए प्रतिमाह के अंतरिम गुजारा भत्ते की राशि को बढ़ाने की मांग की थी। महिला का कहना था कि दिल्ली जैसे शहर में इतनी कम राशि में गुजारा करना संभव नहीं है।
कोर्ट ने माना तय रकम जरूरत के हिसाब से बेहद कम
इस मामले में एक सितंबर को दिए अपने आदेश में अदालत ने कहा कि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि 1840 रुपए महिला की जरूरतों के लिए बेहद कम हैं। हालांकि, अदालत को यह भी देखना होगा कि पति की वास्तविक या अनुमानित आय कितनी है। पति की मासिक आय से अधिक राशि बतौर गुजारा भत्ता नहीं दी जा सकती।
महिला मांग रही थी 15-20 हजार रुपए का गुजारा भत्ता
महिला ने अदालत को बताया था कि उसका पति मेडिकल स्टोर चलाता है, साथ ही कृषि और अन्य व्यवसायिक संपत्तियों से किराये के रूप में उसे अतिरिक्त आय भी प्राप्त होती है। ऐसे में महिला ने दावा किया कि वह 15 से 20 हजार रुपए प्रतिमाह गुजारा भत्ता देने में सक्षम है।
महिला है अशिक्षित, बोली- आय का कोई साधन नहीं
इसके अलावा उसने कोर्ट को बताया कि वह खुद अशिक्षित है और उसके पास आय का कोई साधन नहीं है। साथ ही उसने अपनी शादी में मायके वालों की ओर से दस लाख रुपए से अधिक खर्च किए जाने और घरेलू सामान व गहने दिए जाने का भी दावा किया।
महिला के दावों की निकली हवा, पति ने बताया क्या करता है वह
उधर महिला के पति ने बताया कि वह मेडिकल स्टोर पर हेल्पर या सेल्समैन के रूप में काम करता है और हर महीने करीब आठ हजार रुपए कमाता है। उसने यह भी कहा कि उसे खुद के अलावा तीन बच्चों की जिम्मेदारी भी उठानी है। शख्स की बात सुनने के बाद अदालत ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाया।
अदालत ने 11 हजार रुपए प्रतिमाह मानी शख्स की आय
अदालत ने कहा कि पति समाज के गरीब तबके से है। उसकी आय के बारे में कोई ठोस दस्तावेज पेश नहीं किया गया। ऐसे में निचली अदालत ने उत्तर प्रदेश में लागू न्यूनतम मजदूरी के आधार पर उसकी अनुमानित आय 11,021 रुपए प्रतिमाह मानी थी और परिवार के सदस्यों के बीच आय के बंटवारे के आधार पर 1840 रुपए का अंतरिम गुजारा भत्ता तय किया गया था।
कोर्ट बोला- शख्स की क्षमता से ज्यादा राशि देने का आदेश नहीं दे सकते
अदालत ने इस राशि का आकलन करने में दिल्ली हाईकोर्ट के एक फैसले में तय सिद्धांतों का भी पालन किए जाने की बात कही। अदालत ने कहा कि भले ही तय राशि अपर्याप्त हो, पति को उसकी क्षमता से अधिक भुगतान करने का आदेश नहीं दिया जा सकता। इसके साथ ही अदालत ने महिला की अपील खारिज कर दी और 1840 रुपए का अंतरिम गुजारा भत्ता बरकरार रखा।


