
पत्नी को गुजारा भत्ता मामले में HC ने पति को दिया झटका, खारिज कर दी याचिका
दिल्ली हाईकोर्ट ने पति-पत्नी के बीच गुजारा भत्ता विवाद मामले में एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि अलग होने के बाद किसी महिला द्वारा अपने परिवार को एक बार पैसे देना या उसके बैंक खाते में सेविंग्स होना, पति द्वारा पत्नी को गुजारा भत्ता देने से मना करने का आधार नहीं हो सकता।
दिल्ली हाईकोर्ट ने पति-पत्नी के बीच गुजारा भत्ता विवाद मामले में एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि अलग होने के बाद किसी महिला द्वारा अपने परिवार को एक बार पैसे ट्रांसफर करना, या उसके बैंक अकाउंट में सेविंग्स होना, पति द्वारा पत्नी को गुजारा भत्ता देने से मना करने का आधार नहीं हो सकता।
जस्टिस अनिल क्षत्रपाल और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की बेंच ने 23 दिसंबर को अपने आदेश में कहा कि आमतौर पर शादी में अनबन के बाद अपने माता-पिता के घर रहने वाली पत्नी के आर्थिक रूप से माता-पिता और भाई-बहनों पर निर्भरता होने की संभावना होती है।
हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, कोर्ट ने कहा कि आय, सैलरी या बिजनेस एक्टिविटी के किसी ठोस सबूत के अभाव में ऐसे बैंक ट्रांजैक्शन को किसी छिपे हुए प्रोफेशनल इनकम के सोर्स के बजाय, रूटीन पारिवारिक व्यवस्था या पिछली बचत के इस्तेमाल से जोड़ना ज्यादा सही है।
अकेले ट्रांजैक्शन के आधार पर पर्याप्त इनकम साबित नहीं की जा सकती
बेंच ने कहा, “सिर्फ कुछ सेविंग्स होना या भाई को एक बार रुपयों के लेन-देन करने का मतलब यह नहीं है कि पत्नी के पास इनकम का कोई स्थिर और स्वतंत्र सोर्स है, जो उसके और उसके बच्चे का पति के बराबर स्टेटस मेंटेन करने के लिए काफी है। 2018 के एक अकेले ट्रांजैक्शन के आधार पर पर्याप्त इनकम साबित नहीं की जा सकती या मेंटेनेंस देने से इनकार नहीं किया जा सकता।”
हाईकोर्ट ने यह आदेश एक व्यक्ति की उस याचिका को खारिज करते हुए दिया, जिसमें उसने फैमिली कोर्ट के मार्च 2021 के आदेश को चुनौती दी थी। फैमिली कोर्ट द्वारा उसे अपनी पत्नी और बेटी दोनों को 25,000 रुपये का अंतरिम गुजारा भत्ता देने का निर्देश दिया गया था।
25 साल पहले हुई थी शादी
दंपती ने जनवरी 2001 में शादी की थी और उनकी एक बेटी है। आपसी मतभेद और बढ़ती कड़वाहट के कारण, वे 2015 में अलग रहने लगे। इसके बाद पति ने क्रूरता के आधार पर पत्नी से तलाक की अर्जी दायर की। फैमिली कोर्ट ने उसे अपनी पत्नी और बेटी दोनों को 25,000 रुपये का अंतरिम गुजारा भत्ता देने का निर्देश दिया, जिसे बाद में उसने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
भाई को 82,000 रुपये ट्रांसफर किए थे
महिला के पति ने अपनी याचिका में तर्क दिया कि फैमिली कोर्ट ने पत्नी के इनकम एफिडेविट को अंतिम मानकर अंतरिम गुजारा भत्ता आदेश पारित करने में गलती की थी। उसने बताया कि पत्नी ने 2018 में अपने भाई को 82,000 रुपये ट्रांसफर किए थे, जो यह बताता है कि उसके पास पर्याप्त इनकम थी। उसने कहा कि पिछले तीन सालों में उसकी पत्नी की इनकम 15,000 प्रति महीने से ज्यादा हो गई थी, जो वह पहले मेंटेनेंस के तौर पर दे रहा था।
उसने आगे तर्क दिया कि बिना किसी मुलाकात या निगरानी अधिकार दिए, उसे पैसे देने का निर्देश देना गलत था। अपने बच्चे का पालन-पोषण करने की अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए उसने दावा किया कि उसका इस बात पर कोई कंट्रोल नहीं था कि पैसों का इस्तेमाल उसके भले के लिए किया जा रहा है या नहीं। इसलिए उसने इसकी निगरानी के लिए एक जॉइंट बैंक अकाउंट खोलने का अनुरोध किया। हाईकोर्ट ने 10 पन्नों के अपने आदेश में अनुरोध को खारिज कर दिया।





