क्या चुनावी राजनीति में भी उतरेगी कॉकरोच जनता पार्टी, दीपके की टीम का क्या इशारा
कॉकरोच जनता पार्टी को लेकर बार-बार यह सवाल उठाया जा रहा है कि क्या इनका मकसद राजनीतिक है। अब सीजेपी के तीनों प्रवक्ताओं ने इस सवाल के जवाब में विकल्पों के खुले रहने की ओर इशारा किया है।

दिल्ली के जंतर-मंतर पर करीब एक महीने से आंदोलन कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का जन्म भले ही सोशल मीडिया पर एक मजाक के रूप में हुआ, लेकिन युवाओं का एक वर्ग इसे उम्मीद भरी निगाहों से देख रहा है। गठन के बाद चंद दिनों में ही भाजपा और कांग्रेस की तुलना में अधिक सोशल मीडिया फॉलोअर्स जुटाने वाली सीजेपी को लेकर बार-बार यह सवाल उठ रहा है कि क्या भविष्य में यह एक राजनीतिक दल का स्वरूप लेगी? शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही अभिजीत दीपके की टीम से जब इस पर सवाल किया गया तो उन्होंने 'हां या ना' से बचते हुए भी विकल्पों के खुले होने की ओर इशारा जरूर कर दिया।
अभिजीत दीपके और उनके प्रवक्ताओं से जंतर-मंतर पर एक इंटरव्यू के दौरान राजनीति में उतरने के विकल्प को लेकर सवाल किया गया तो सीजेपी फाउंडर ने खुद इसका जवाब देने की बजाय इशारा प्रवक्ताओं की ओर किया। एक एक करके तीनों ही प्रवक्ताओं ने अपने-अपने शब्दों में जवाब दिया, लेकिन अपने भविष्य को लेकर उन्होंने कोई स्पष्ट रूपरेखा जाहिर नहीं की। हालांकि, सोशल मीडिया पर कई लोग सीजेपी के भविष्य को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं, क्योंकि सोशल मीडिया फॉलोअर्स का रिकॉर्ड बनाने वाली 'पार्टी' जंतर-मंतर पर भीड़ जुटाने में सफल नहीं हुई है।
राजनीति खराब चीज नहीं: दहिया
इंडियन एक्सप्रेस की ओर से एक इंटरव्यू में जब दीपेक और उनके साथियों से सवाल किया गया तो सीजेपी फाउंडर ने कहा कि हम अभी से इस पर क्या बोलें। उन्होंने अपने प्रवक्ताओं की ओर इशारा किया तो सबसे पहले विजेता दहिया ने मोर्चा संभाला। उन्होंने कहा कि राजनीति खराब चीज नहीं है। दहिया ने कहा, 'मैं यह कहूंगा कि बहुत से लोग कहते हैं कि अच्छा ये राजनीति में आना चाहते हैं। पहले तो हमें यह परसेप्शन (साफ) करना चाहिए कि राजनीति कोई खराब चीज नहीं है और लोगों को आना चाहिए। लेकिन अभी हमें लगता है कि जन आंदोलन की तरह इसकी संभावना ज्यादा है। लोगों में यह चेतना होना कि लोकतंत्र का मतलब यह नहीं कि आप पांच साल में वोट देकर आ गए। जिनको आपने वोट दिया उनसे लगातार सवाल करना।'
सौरव दास ने क्या जवाब दिया
इसके बाद बारी दूसरे प्रवक्ता सौरव दास की थी। उन्होंने कहा, 'इतने राजनीतिक दल है, 750-800 राजनीतिक दल हैं, तब भी लोगों में हताशा है तो उन्हें सोचना चाहिए कि वे कहां गलत कर रहे हैं। हमारा तो एक मूवमेंट है। हमें इतना पूछा जाता है कि आप राजनीतिक दल बनोगे, बनोगे... ऐसा लग रहा है कि एक दिन मीडिया ही घोषणा कर देगी कि ये राजनीतिक दल हैं। उनको जल्दी है। मुद्दा यह है कि इतने राजनीतिक दलों से कैसे काम कराएं। यह तभी होगा जब यह आंदोलन जमीन पर उतरेगा तो लोग किसी भी पार्टी से काम करा लेंगे।'
रांका ने किया इशारा- विकल्प खुले हुए
दहिया और दास के बाद आशुतोष रांका ने माइक संभाला तो उन्होंने भी भले ही हां या ना में जवाब नहीं दिया, लेकिन उन्होंने यह जरूर साफ कर दिया कि सभी विकल्प खुले हुए हैं और आगे जिस भी तरीके से बेहतर परिणाम की उम्मीद होगी, वैसा किया जाएगा। उन्होंने कहा, 'सबसे पहले तो हमें राजनीतिक दल तक सीमित रखना बंद करना होगा। हर चीज का मतलब यह नहीं कि आप पांच साल में वोट मांगने जाओ राजनीतिक दल बनकर। सिविल सोसाइटी, प्रेशर ग्रुप और इस तरह के आंदोलन भी लोकतंत्र का हिस्सा है। हर इस तरह के आंदोलन से उम्मीद करना कि वह राजनीतिक दल बने यह अनफेयर है। हमारे लिए अभी मुद्दा जरूरी है। जवाबेदी सिस्टम में बनाना जरूरी है, यह लक्ष्य हमें जिस तरफ ले जाएगा, हम जाएंगे। अंत में जो हमारी सबसे बड़ी लड़ाई है कि हमारी जेनरेशन की आवाज सुनी जाए वह जिस तरह ज्यादा प्रभावी होगा, हम वह करेंगे।
लेखक के बारे में
Sudhir Jhaसुधीर झा | वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम लीड
(दिल्ली-एनसीआर, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, गुजरात, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश)
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