क्या फिर संसद मार्च करेंगे ‘कॉकरोच’? अभिजीत दीपके को किस बात का डर

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि अब दोबारा संसद मार्च नहीं होगा क्योंकि ऐसा करने पर पुलिस फिर से युवाओं को पीटेगी। दीपके ने दिल्ली में सोमवार को मार्च के दौरान पुलिस पर क्रूरता करने का आरोप लगाया।

Abhijit dipke
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कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा है कि उनका संगठन अब संसद मार्च दोबारा नहीं निकालेगा। दीपके ने कहा कि उन्हें डर है कि दोबारा मार्च निकालने पर पुलिस फिर से युवाओं को पीटेगी। उन्होंने दिल्ली में सोमवार को संसद मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस पर बर्बरता का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारी स्टूडेंट्स के साथ मारपीट की और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल किया। दीपके ने कहा कि कल हमने देखा कि दिल्ली पुलिस ने कितनी बर्बरता और क्रूरता से बच्चों को पीटा। उन्होंने 12 साल की लड़कियों के सिर फोड़ दिए और ऐसा करने वाले पुरुष पुलिस अधिकारी थे। बता दें कि सोमवार को संसद मार्च के दौरान पुलिस की कार्रवाई में लगभग 60-70 प्रदर्शनकारी घायल हुए हैं, जबकि आंदोलनकारियों की तरफ से पथराव में 100 से ज्यादा पुलिस वाले भी जख्मी हुए हैं।

अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि पुलिस की वर्दी में गुंडे भरे थे। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों ने युवा प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट और हाथापाई की। दीपके ने यह भी दावा किया कि लाठी लगने से एक लड़की की गर्दन पर गंभीर चोट आई है। वह लड़की आरएमएल अस्पताल में गंभीर हालत में भर्ती है। गर्दन पर चोट लगने के बाद वह जमीन पर गिरी और भगदड़ मच गई। उस लड़की को कुछ भी होता है तो पुलिस और सरकार जिम्मेदार होगी।

पुलिस के तरीके पर अभिजीत ने उठाए सवाल

अभिजीत दीपके ने प्रदर्शन को संभालने के पुलिस के तरीके पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अधिकारी लाठीचार्ज करने के बजाय वॉटर कैनन का इस्तेमाल कर सकते थे। दीपके ने कहा कि अगर वे मार्च रोकना चाहते थे तो वॉटर कैनन का इस्तेमाल कर सकते थे। आखिरकार वे बच्चे ही तो हैं। ये 17-18 साल के बच्चे थे। हम यहां एक महीने से शांति से बैठे थे। कोई गड़बड़ नहीं हुई। कल पुलिस ने सबसे पहले हमला किया। उन्होंने लाठियों का इस्तेमाल किया और फिर भगदड़ मच गई।

अभिजीत ने कहा- पुलिस बताए कि पत्थरों से भरे ट्रक कहां से आए

दीपके ने विरोध स्थल के पास पत्थरों की मौजूदगी पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि यह घटना दिल्ली पुलिस द्वारा सुनियोजित थी। उन्होंने कहा कि कल पत्थर से भरे ट्रक कहां से आए? यहां पुलिस परिंदे को भी पर नहीं मारने दे रही है। हमारे हर सदस्य की तलाशी ली जा रही है, उनके बैग और जेब चेक की जा रही है। बैरियर से सब कुछ रोका जा रहा था। लोगों को अंदर नहीं आने दिया जा रहा था। ऐसे में जंतर-मंतर के पास पत्थर से भरे ट्रक कहां से आ गए? पुलिस को इसका जवाब देना चाहिए।

Subodh Kumar Mishra

लेखक के बारे में

Subodh Kumar Mishra

सुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।

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शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।

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