धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ से पहले क्यों तोड़ दिया अनशन? सोनम वांगचुक ने बताई सबसे बड़ी वजह
24 जुलाई को 26 दिनों से लगातार अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक ने अपना अनशन तोड़ दिया। वांगचुक ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से पहले अनशन तोड़ने की वजह बताई है।

28 जून से लगातार भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक ने 23 जलाई की देर रात या यों कहें कि 24 जुलाई के शुरुआती घंटों में अपना अनशन तोड़ दिया। उनके इस फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल आया कि जिस मांग को लेकर सोनम वांगचुक अनशन पर बैठे थे, वो मांग तो पूरी नहीं हुई, फिर उन्होंने अनशन क्यों तोड़ दिया। इस मामले पर अब सोनम वांगचुक का बयान सामने आया है। सोनम वांगचुक ने अपनी प्राथमिकता बताते हुए अनशन तोड़ने की वजह बताई है।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से पहले क्यों तोड़ दिया अनशन
24 जुलाई को केंद्र सरकार के दो मंत्री गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल पहुंचे और सोनम वांगचुक का अनशन खत्म करवाया। वांगचुक का अनशन खत्म होने के बाद इस मामले पर बात करते हुए सोनम वांगचुक ने जवाब दिया है। सोनम वांगचुक का कहना है कि उन्होंने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से पहले अनशन इसलिए खत्म कर दिया, क्योंकि वो 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों पर हुई बर्बरता के बाद उनपर होने वाली कार्रवाई को रोकना चाहते थे।
मान ली गई थी ये मांगें
बता दें कि 24 जुलाई को केंद्र सरकार में मंत्री जितेंद्र सिंह और जेपी नड्डा गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में पहुंचे थे। यहां उन्होंने सोनम वांगचुक को लिखित अश्वासन दिया था कि सरकार प्रदर्शनकारियों पर कोई मामला नहीं दर्ज करेगी, संसद में परीक्षा सुधारों और पेपर लिक पर विस्तार से चर्चा होगी और नीट पेपर लीक के बाद सुसाइड करने वाले छात्रों के परिजनों को मुआवजा दिया जाएगा। सोनम वांगचुक को इतना लिखित अश्वासन मिलने के बाद उन्होंने अपना अनशन तोड़ दिया। सोनम वांगचुक ने कहा कि उनकी प्राथमिकता छात्रों को कानूनी कार्रवाई से बचाना था।
बता दें कि बीते 28 जून से जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के मुद्दे को लेकर प्रदर्शन चल रहा है। इस प्रदर्शन में लोगों की मांग है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना होगा। इसके बाद आई 20 जुलाई की तारीख, जब सीजेपी ने संसद मार्च का आह्वान किया था। इस मार्च में चलने के दौरान छात्रों पर दिल्ली पुलिस ने हमला किया और उन्हें लाठियों और डंडों से मारा। इस दौरान पैलेट गन और स्टन गन से भी छात्रों पर हमला किया गया। पुलिस की इस बर्बरता से पहले सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से उठा लिया गया था। जिसके बाद उन्हें सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। प्रशासन का कहना था कि वो सोनम वांगचुक को इलाज करवाने के लिए अस्पताल लेकर गए थे।


