राघव चड्ढा की कुर्सी क्यों छीन ली? केजरीवाल की 'सबसे बड़ी खुशी' पर चुप्पी समेत इन वजहों की चर्चा
आम आदमी पार्टी और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के बीच पिछले कुछ समय से बढ़ती दूरियों के बीच अरविंद केजरीवाल के दल ने गुरुवार को जो फैसला लिया उसके बाद अलगाव की संभावनाएं और प्रबल हो गईं। इसके पीछे कई वजहें बताई जा रही हैं।

आखिर वही हुआ जिसका अंदाजा-अंदेशा दिल्ली के राजनीतिक पंडितों को पिछले कुछ महीनों से था। आम आदमी पार्टी और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के बीच पिछले कुछ समय से बढ़ती दूरियों के बीच अरविंद केजरीवाल के दल ने गुरुवार को जो फैसला लिया उसके बाद अलगाव की संभावनाएं और प्रबल हो गईं। आप ने राघव को राज्य सभा में डिप्टी लीडर के पद से हटा दिया है।
दरअसल, पिछले कई महीनों में ऐसे कई संकेत मिल रहे थे जिनसे अटकलें लग रही थीं कि आप और चड्ढा के बीच सबकुछ सामान्य नहीं है। इसकी सबसे बड़ी बानगी तो तब देखने को मिली जब फरवरी के अंत में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत 'आप' के कई नेताओं को कथित शराब घोटाले में ट्रायल कोर्ट ने आरोप मुक्त किया।
केजरीवाल की सबसे बड़ी खुशी पर चुप्पी
अदालत के फैसले को अपने लिए ईमानदारी का सर्टिफिकेट बताने वाले अरविंद केजरीवाल के लिए यह पिछले कुछ सालों की सबसे बड़ी खुशी थी। पूरी पार्टी जश्न मना रही थी। लेकिन इस दौरान राघव चड्ढा जश्न में शामिल होना तो दूर उन्होंने एक्स पर भी रस्म अदायगी तक नहीं की। उनकी इस चुप्पी ने ना सिर्फ राजनीतिक जानकारों को हैरान किया, बल्कि पार्टी भी असहज नजर आई। मनीष सिसोदिया, संजय सिंह समेत हर बड़े नेता से मीडिया बार-बार यह सवाल पूछ रहा था जिसका उनके पास कोई संतोषजनक जवाब नहीं था।
पार्टी का नाम, निशान हो चुका था गायब
कभी अरविंद केजरीवाल के सबसे खास रणनीतिकार और भरोसेमंद माने जाने वाले राघव चड्ढा और पार्टी के बीच लंबे समय से दूरियां बढ़ रही थीं। धीरे-धीरे नौबत यहां तक पहुंच चुकी थी कि राघव चड्ढा पार्टी के नाम और निशान तक से दूरी बना रहे थे। एक्स पर शेयर किए जाने वाले पोस्ट, वीडियो में ना तो उनकी पार्टी का नाम दिखता था और ना ही झंडा या निशान।
अपनी ब्रैडिंग में जुटे थे राघव चड्ढा?
आम आदमी पार्टी से जुड़े सूत्र बताते हैं कि पार्टी इस बात को लेकर भी असहज थी कि राघव चड्ढा राज्यसभा में पार्टी की नीतियों और कार्यक्रम के मुताबिक नहीं बल्कि ऐसे मुद्दे उठा रहे थे जिससे उनकी अपनी व्यक्तिगत छवि बने, या यूं कहें कि वह पार्टी की बजाय अपनी ब्रांडिंग में जुटे थे।
सरकार के नजदीक दिख रहे थे?
कभी पंजाब में अघोषित सीएम कहे जाने वाले राघव चड्ढा अब दिल्ली में भी पार्टी के कार्यक्रमों में सक्रिय नहीं दिख रहे थे। दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान जरूर वह कुछ रैलियों और कार्यक्रमों में दिखे लेकिन इसके बाद वह ऐसे राष्ट्रीय मुद्दों को उठाने में जुटे थे जिनसे उनकी लोकप्रियता बढ़ रही है। पिछले कुछ समय में कई बार ऐसा हुआ जब उन्होंने सदन में किसी बड़ी समस्या का मुद्दा उठाया और सरकार ने तत्परता से उसका समाधान किया। राघव इन पर फैसलों पर खुशी जाहिर करने से नहीं चूकते थे और इससे पार्टी में संदेश गया कि वह भाजपा के नजदीक जा रहे हैं।
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Sudhir Jhaसुधीर झा | वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम लीड
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