
नए साल पर जश्न छोड़ भूख हड़ताल पर क्यों बैठ गई गुरुग्राम की ये महिला, कर दी खास मांग
सरीन ने आरोप लगाया कि हालांकि ग्रैप (Grap) स्टेज-1 और स्टेज-2 जैसे आपातकालीन उपायों की बार-बार घोषणा की गई, लेकिन स्थानीय लोगों को इससे कोई राहत नहीं मिली। उन्होंने कहा कि दिल्ली में फिर भी जवाबदेही तय थी, लेकिन हरियाणा में नहीं।
साल बदल गया पर दिल्ली-NCR की हवा नहीं बदली। लोगों की 2026 की शुरुआत वही जहरीली दमघोंटू हवा के बीच हुई। इस बीच 'मेकिंग मॉडल गुरुग्राम' (MMG) संस्था की संस्थापक गौरी सरीन ने बुधवार शाम से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है। उन्होंने नए साल की रात जश्न को न चुनकर सरकार को ही कटघरे में खड़ा कर दिया। पलूशन के खिलाफ उनके इस कदम को करीब 100 नागरिकों का समर्थन मिला है।
क्यों चुनी भूख हड़ताल?
भूख हड़ताल पर बैठीं गौरी सरीन ने कहा कि उन्होंने इस बार नए साल की पूर्व संध्या को अलग तरीके से मनाने का फैसला किया है। उन्होंने बताया, “आज का दिन वह है जब ज्यादातर लोग जीवन का जश्न मनाते हैं और नई उम्मीदों का स्वागत करते हैं। मैंने एक खास मकसद के साथ बाहर निकलने का रास्ता चुना है। हम सभी ने खतरनाक रूप से खराब वायु गुणवत्ता (AQI) की मार झेली है, लेकिन बहुत से लोगों ने चुपचाप अपने फेफड़ों और दिल को नुकसान पहुंचते देखा है।”
उन्होंने 'द लांसेट' (The Lancet) जैसे मेडिकल जर्नल में छपी अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों का हवाला दिया, जो वायु प्रदूषण को दिल और सांस की बीमारियों से जोड़ती हैं। उन्होंने आगे कहा, “अभी दो दिन पहले ही, मैंने चार किलोमीटर के दायरे में धूल का बेहद खतरनाक स्तर देखा था। उसी समय मैंने उपवास (भूख हड़ताल) करने का फैसला लिया।”
अपील पर कोई जवाब नहीं मिला
सरीन ने आरोप लगाया कि हालांकि ग्रैप (Grap) स्टेज-1 और स्टेज-2 जैसे आपातकालीन उपायों की बार-बार घोषणा की गई, लेकिन स्थानीय लोगों को इससे कोई राहत नहीं मिली। उन्होंने कहा, "दिल्ली में फिर भी जवाबदेही तय थी, लेकिन हरियाणा में नहीं। पिछले तीन सालों से मुख्य सड़कों जैसे SPR से लेकर व्यापार केंद्र और हैमिल्टन रोड तक धूल के बड़े-बड़े ढेर बिना ढके पड़े रहे। जिला प्रशासन, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और यहां तक कि पर्यावरण मंत्री से बार-बार की गई अपीलों का कोई जवाब नहीं मिला।"
उनके अनुसार, 2023 में हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के तत्कालीन प्रमुख की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में नागरिकों द्वारा तैयार की गई एक कार्य योजना (Action Plan) बनी थी, लेकिन उसे कभी लागू नहीं किया गया। उन्होंने बताया कि हालांकि हाल ही में GMDA के नए मुख्य कार्यकारी के साथ चर्चा के बाद कुछ काम शुरू हुआ है, लेकिन 'सदर्न पेरिफेरल रोड' (SPR) अभी भी शहर में प्रदूषण फैलाने वाला सबसे बड़ा कारण बना हुआ है।
वहीं, विरोध प्रदर्शन वाली जगह पर शामिल लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की गई। उनसे हर समय मास्क पहनने, किसी भी राजनीतिक झंडे या नारे का इस्तेमाल न करने और किसी भी तरह की निजी टिप्पणी या अपशब्दों से बचने को कहा गया। उनसे यह भी अनुरोध किया गया कि वे पुलिस और सार्वजनिक संपत्ति का सम्मान करें, स्वयंसेवकों के निर्देशों का पालन करें, गलत जानकारी फैलाने से बचें और प्रदर्शन स्थल पर साफ-सफाई बनाए रखें।
ऐसा आंदोलन बहुत जरूरी...
पर्यावरण विशेषज्ञ वैशाली राणा ने कहा कि यह विरोध प्रदर्शन एक बहुत ही महत्वपूर्ण समय पर हो रहा है। उन्होंने कहा, "वायु प्रदूषण अब केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं रह गया है,यह सीधे तौर पर स्वास्थ्य का संकट है। अधिकारियों को जवाबदेह और ठोस कदम उठाने के लिए मजबूर करने हेतु नागरिकों का ऐसा आंदोलन बहुत जरूरी है।"
DXPGDA के संयुक्त संयोजक सुनील सरीन ने कहा कि निवासी रहने लायक शहर की मांग कर रहे हैं, न कि अंधाधुंध निर्माण की। उन्होंने कहा, "विकास ऐसा होना चाहिए जो पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाए। नागरिक सरकार के साथ मिलकर काम करने को तैयार हैं, लेकिन साफ हवा के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता।" गोल्फ कोर्स रोड (GCR) पर बीकानेरवाला के पास इकट्ठा हुए लोगों को संबोधित करते हुए सरीन ने कहा, "हम कोई एहसान नहीं मांग रहे हैं। हम सम्मान के साथ जीने और सांस लेने के अपने अधिकार की मांग कर रहे हैं। आइए, साल 2026 को जवाबदेह शासन और नागरिक भागीदारी का वर्ष बनाएं।"





