
दिल्ली में ग्रैप 4 की पाबंदियां फिर भी क्यों जहरीली होती जा रही हवा? यह है असली वजह
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण की रोकथाम को सख्त पाबंदियां लागू होने के बावजूद रविवार सुबह आठ बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) लगभग 460 दर्ज किया गया।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण की रोकथाम को सख्त पाबंदियां लागू होने के बावजूद रविवार सुबह आठ बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) लगभग 460 दर्ज किया गया। यह वायु प्रदूषण की बेहद खतरनाक स्थिति का संकेत देता है।
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम ) ने शनिवार को हवा को और प्रदूषित होने से रोकने के लिए ग्रैप 4 लागू कर दी थी। गौरतलब है कि आयोग ने शनिवार को पहले ग्रैप-3 लागू किया था, लेकिन कुछ ही घंटों बाद वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ने पर दिल्ली शहर और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में ग्रैप-4 लगा दिया। गाड़ियों और धूल प्रदूषण को दिल्ली में हवा की गुणवत्ता की बिगड़ती स्थिति के लिए मुख्य कारण माना जा रहा है।
ग्रैप-4 के प्रतिबंधों में निर्माण और तोड़फोड़ की गतिविधियों पर रोक, प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के प्रवेश पर पाबंदी, और बाहरी गतिविधियों को कम करने की सलाह के साथ-साथ हाइब्रिड या ऑनलाइन स्कूलिंग की सिफारिशें शामिल हैं।
क्यों बिगड़ती जा रही दिल्ली की हवा?
एचटी की रिपोर्ट के अनुसार, लगातार बनी हुई गंभीर वायु गुणवत्ता का मुख्य कारण मौसम का मिजाज है, खासकर पश्चिमी विक्षोभ जिसके चलते शुक्रवार से हवा की गति बहुत कम है। स्काईमेट के उपाध्यक्ष महेश पलावत के अनुसार, हवा की इस कम गति के कारण प्रदूषण के स्तर में भारी वृद्धि हुई है, और पश्चिमी विक्षोभ के चलते रविवार को भी वायु गुणवत्ता स्तर इसी स्तर पर बना रह सकता है।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि शहर की घाटी जैसी बनावट और सर्दियों के मौसम का एक साथ आना ही प्रदूषण की समस्या को सबसे ज्यादा बढ़ाता है। सर्दियों में, शहर के बीच की हवा ठंडी होकर नीचे बैठ जाती है, जबकि उसके ऊपर की हवा थोड़ी गर्म रहती है। यह गर्म हवा एक ढक्कन की तरह काम करती है, जो नीचे फंसी हुई ठंडी हवा को ऊपर उठने नहीं देती।
इस ठंडी हवा में ही गाड़ियों का धुआं और निर्माण की धूल जैसे प्रदूषक जमा हो जाते हैं। प्रदूषकों को ऊपर जाने का रास्ता नहीं मिलता, इसलिए वे जमीन के बहुत करीब फंसे रहते हैं। साथ ही, जब बारिश नहीं होती और हवा भी धीरे चलती है, तो यह फंसा हुआ प्रदूषण बाहर नहीं निकल पाता, जिससे स्थिति कई गुना खराब हो जाती है।





