अनशन तोड़ने में जल्दबाजी, खुद जंतर-मंतर से आगे नहीं बढ़े; अभिजीत दीपके के आलोचक क्या कह रहे
चाहे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात हो या संसद भवन तक मार्च को, अभिजीत दीपके हर बार अहम पलों में गायब रहे। इसके अलावा अनशन तोड़ने में भी जल्दबाजी करना कई सवाल खड़े कर रहा है।

कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन का शोर आज पूरे देश में गूंज रहा है। राजनेताओं से लेकर अभिनेताओं तक, लोग खुलकर इसके समर्थन में आवाज उठा रहे हैं। देशभर से छात्रों की भीड़ जंतर-मंतर पर इकट्ठा हो रही है। पुलिस की लाठियां और आंसू गैस के गोले दागे जाने के बाद भी वे वहां से जाने को तैयार नहीं है। उधर सोनम वांगचुक की भूखहडडताल पर डटे हुए हैं। जबरदस्ती अस्पताल ले जाए जाने के बाद भी उन्होंने भूखहड़ताल खत्म नहीं की है। इस बीच लोगों के जहन में एक नाम जो खटक रहा है, वह है इस प्रोटेस्ट का नेतृत्व कर रहे अभिजीत दीपके। हर जरूरी घटनाक्रम के दौरान, उनका अचानक गायब हो जाना, प्रोटेस्ट मार्च का नेतृत्व ना करना और अनशन तोड़ने में भी इतनी जल्दबाजी करना, अब कई लोगों के मन में सवाल खड़े कर रहा है।
20 जुलाई को संसद तक कॉकरोच जनता पार्टी ने मार्च किया। देशभर से कई लोगों ने इसमें हिस्सा लिया जिसमें हजारों छात्र भी शामिल थे। इस मार्च का ऐलान करने वाले अभिजीत दीपके ही थे। लेकिन वह खुद कहीं दूर-दूर तक मार्च में नजर नहीं आए। मार्च में शामिल प्रदर्शनकारी पुलिस की लाठियां खाते-खाते और आंसू गैसे के गोले झेलते हुए संसद भवन के करीब तक पहुंच गए। विपक्ष के कई नेता भी इसमें शामिल हुए लेकिन अभिजीत दीपके जंतर-मंतर पर ही डटे रहे। इतना ही नहीं इसी दौरान उन्होंने अपना अनशन भी तोड़ दिया।
बताया जा रहा है कि सोनम वांगचुक ने उनसे रिक्वेस्ट की थी कि वह अपना अनशन तोड़ दें क्योंकि प्रदर्शन का नेतृत्व करने के लिए उनका स्वस्थ्य रहना जरूरी था। शनिवार को शुरू किए गए भूखहड़ताल को अभिजीत ने महज 50 घंटों में ही तोड़ दिया जबकि सोनव वांगचुक पिछले 24 दिनों से अनशन पर डटे हुए हैं।
हिरासत में लिए जाने की अफवाह से फैलाई सनसनी
मार्च के दौरान कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की खबर भी सामने आ रही थी। इस बीच हर किसी को अभिजीत दीपके का गायब हो जाना खल रहा था। इसी दौरान सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरभ दास ने एक्स पर पोस्ट कर दिया कि अभिजीत को भी पुलिस ने उठा लिया है। इस खबर से सनसनी फैलाने के करीब एक घंटे बाद उन्होंने साफ किया कि उन्हें हिरासत में नहीं लिया गया है औऱ वह केरल हाउस में है। सोमवार शाम को वह मंच पर लोगों को संबोधित करते नजर आए।
हर अहम पल में गायब रहे दीपके
सोनम वांगचुक ने जब से अनशन शुरू किया था, तब से अभिजीत दीपके उनके साथ ही थे। हर रोज सुबह वह उनके साथ ही बैठते थे। शनिवार सुबह भी वह उनके साथ ही थे लेकिन जब उन्हें जबरदस्ती सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया तब अचानक ही वह गायब हो गए। बताया गया कि वह पास में ही फ्रेश होने गए थे। हालांकि कुछ देर बाद वह फिर दिखाई दिए लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। हैरान करने वाली बात ये है कि जब कॉकरोच जनता पार्टी को सरकार के सामने अपनी बात रखने का मौका मिला, तब भी दीपके नहीं बल्कि सीजेपी के दो मुख्य प्रवक्ता सौरभ दास और आशुतोष रांका गए।
उन्होंने दावा किया कि दो घंटे के इंतजार के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से उनकी केवल 10 मिनट की मुलाकात हुई। लेकिन अभिजीत दीपके ना तो इस 10 मिनट की मुलाकात में पहुंचे और ना ही तब गए जब जेपी नड्डा को लिखित मांगों वाली याचिका सौंपी जानी थी।
इन सब के बीच गौर करने वाली बात ये भी है कि अभिजीत दीपके लंबे गायब तो हुए लेकिन कुछ समय बाद फिर लोगों के सामने पेश हो गए गए। लेकिन जिन पलों में वह गायब रहे वह काफी अहम थे। यही वजह है कि कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन का नेतृत्व करने के बावजूद वह इसका मुख्य चेहरा वह नहीं बल्कि सोनम वांगचुक रहे।


