AK-47 के साथ 2007 में गिरफ्तार, 2015 में फिर पकड़ा गया… कौन है दिल्ली में दबोचा गया आतंकी शबीर लोन?

Ratan Gupta नई दिल्ली, एएनआई
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शबीर लोन कोई नया नाम नहीं, बल्कि वह पहले भी दो बार हथियारों के साथ गिरफ्तार हो चुका है और अब एक बार फिर आतंकी गतिविधियों में सक्रिय पाया गया है।

AK-47 के साथ 2007 में गिरफ्तार, 2015 में फिर पकड़ा गया… कौन है दिल्ली में दबोचा गया आतंकी शबीर लोन?

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने जिस आतंकी शबीर अहमद लोन को गाजीपुर इलाके से गिरफ्तार किया है, उसकी कहानी एक बार फिर देश की सुरक्षा एजेंसियों के सामने बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। शबीर लोन कोई नया नाम नहीं, बल्कि वह पहले भी दो बार हथियारों के साथ गिरफ्तार हो चुका है और अब एक बार फिर आतंकी गतिविधियों में सक्रिय पाया गया है।

2007 और 2015 में हो चुका गिरफ्तार

पुलिस के अनुसार, शबीर अहमद लोन को पहली बार साल 2007 में स्पेशल सेल ने गिरफ्तार किया था। उस समय उसके पास से एके-47 राइफल और हैंड ग्रेनेड बरामद हुए थे। इस मामले में उसे दोषी भी ठहराया गया था। उस वक्त ये टार्गेट किलिंग करने आया था। ये पूरी तरह से ट्रेन किया गया आतंकवादी है। पाकिस्तान से होने वाली 2 ट्रेनिंग दौरा ए आम और दौरा ए खास, इसने दोनों की हुई हैं।

इसके बाद 2015 में जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में परिमपोरा थाना क्षेत्र में उसे फिर से पकड़ा गया, जहां उसके पास से फिर एके-47 जैसे घातक हथियार मिले थे। इसके साथ एक अन्य आतंकी सज्जाद गुरु भी अरेस्ट हुआ था। गिरफ्तारी के बाद जेल से छूटने के बाद वो पाकिस्तान चला गया और वहां TRF नामक संगठन बनाया।

पाकिस्तान की ISI से जुड़े हैं तार

जांच एजेंसियों के मुताबिक, जेल से बाहर आने के बाद शबीर लोन भारत से फरार होकर बांग्लादेश चला गया, जहां उसने लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़े नए हैंडलर्स के संपर्क में आकर एक नया मॉड्यूल खड़ा किया। बताया जा रहा है कि उसके हैंडलर्स पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े थे और उनका मकसद भारत में आतंकी गतिविधियों को फिर से सक्रिय करना था।

पकड़े गए 8 लोगों के मॉड्यूल का है मास्टरमाइंड

दिल्ली पुलिस के अनुसार, हाल ही में पकड़े गए आठ लोगों के मॉड्यूल का मास्टरमाइंड भी शबीर लोन ही था। इस मॉड्यूल में सात बांग्लादेशी नागरिक और एक भारतीय शामिल थे। इन लोगों के जरिए देश के विभिन्न हिस्सों, खासकर भीड़भाड़ वाले इलाकों और संवेदनशील स्थानों की रेकी करवाई जा रही थी। इतना ही नहीं, इनकी गतिविधियों के वीडियो भी पाकिस्तान भेजे जा रहे थे।

भारत में टारगेट किलिंग और बड़े हमले की फिराक में था

पुलिस का कहना है कि शबीर लोन भारत में टारगेट किलिंग और बड़े हमलों की साजिश को अंजाम देने की फिराक में था। शबीर अहमद लोन के पास से 2300 बांग्लादेशी टका, 1400 रुपये नेपाल की करेंसी, 5000 रुपये पाकिस्तानी करेंसी और 3000 भारतीय रुपये के साथ एक नेपाली सिम भी मिली है। अलग-अलग देशों की करेंसी मिलना अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की ओर इशारा करता है।

सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि दो बार गिरफ्तार होने के बावजूद शबीर लोन फिर से कैसे सक्रिय हो गया। फिलहाल उससे गहन पूछताछ की जा रही है और उसके नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने की कोशिश जारी है।

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रतन गुप्ता एक डिजिटल हिंदी जर्नलिस्ट/ कॉन्टेंट प्रोड्यूसर हैं। वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान की स्टेट न्यूज टीम के साथ काम कर रहे हैं। वह क्राइम, राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर न्यूज आर्टिकल और एक्सप्लेनर स्टोरीज लिखते हैं।


रतन गुप्ता वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर स्टेट न्यूज टीम में काम करते हैं। इस टीम में हिंदी पट्टी के 8 राज्यों दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गुजरात से जुड़ी खबरों की कवरेज करते हैं। उनका लेखन खास तौर से क्राइम, राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित रहता है।


लाइव हिंदुस्तान में बीते 2 साल से काम करते हुए रतन ने ब्रेकिंग न्यूज, राजनीतिक घटनाक्रम और कानून-व्यवस्था से जुड़ी खबरों पर लगातार लेखन किया है। इसके साथ ही वह एक्सप्लेनर स्टोरीज लिखने में भी विशेष रुचि रखते हैं, जहां जटिल मुद्दों को सरल और तथ्यपरक भाषा में पाठकों के सामने रखते हैं।


रतन गुप्ता ने बायोलॉजी में ग्रेजुएशन किया है, जिसके बाद उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की है। साइंस बैकग्राउंड होने के कारण उनकी न्यूज और एनालिसिस स्टोरी में साइंटिफिक टेंपरामेंट, लॉजिकल अप्रोच और फैक्ट-बेस्ड सोच साफ दिखाई देती है। वह किसी भी मुद्दे पर रिपोर्टिंग करते समय दोनों पक्षों की बात, मौजूद तथ्यों और आधिकारिक स्रोतों को प्राथमिकता देते हैं, ताकि यूजर तक संतुलित और भरोसेमंद जानकारी पहुंचे।


इसके साथ ही आईआईएमसी की एकेडमिक पढ़ाई ने उन्हें रिपोर्टिंग, न्यूज प्रोडक्शन, मीडिया एथिक्स और पब्लिक अफेयर्स की गहरी समझ दी है। इसका सीधा असर उनके लेखन की विश्वसनीयता और संतुलन में दिखाई देता है।

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