
गाजियाबाद में कहां बनाई जाएगी सीवर से बायो गैस? 1 दिन में बनेगी 5 हजार किलो CNG
एक दिन में करीब पांच हजार किलो बायो सीएनजी गैस बनाई जाएगी। गैस का इस्तेमाल निगम अपने वाहनों में भी करेगा। निगम का दावा है कि इससे वायु गुणवत्ता में सुधार होगा।
गाजियाबाद नगर निगम सीवर के पानी और मलबे से बायो सीएनजी गैस बनाएगा। इसके लिए वाबाग कंपनी को वर्क ऑर्डर जारी किया है। डूंडाहेडा स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) पर गैस बनाने के लिए प्लांट लगेगा। एक दिन में करीब पांच हजार किलो बायो सीएनजी गैस बनाई जाएगी। गैस का इस्तेमाल निगम अपने वाहनों में भी करेगा। निगम का दावा है कि इससे वायु गुणवत्ता में सुधार होगा।

निगम ने पहले गीले कूड़े से सीएनजी गैस का प्लांट क्रॉसिंग रिपब्लिक के पास लगाने की योजना बनाई थी। इसका स्थानीय लोगों ने विरोध शुरू कर दिया था। लोगों का कहना कि प्लांट लगने से आसपास की सभी सोसाइटी में कूड़े की दुर्गंध रहेगी। इसके बाद क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने प्लांट लगाने की अनुमति नहीं दी थी। निगम ने अब पीपीपी मोड पर सीवर के पानी और मलबे से बायो सीएनजी गैस बनाने की तैयार की है।
डूंडाहेड़ा में 56 एमएलडी का एसटीपी है। इसमें सीवर के पानी को शोधित करते समय हानिकारक गैस निकलती है। अब पानी और मलबे से बायो सीएनजी गैस बनाई जाएगी।
जलकल विभाग के महाप्रबंधक कामाख्या प्रसाद आनंद ने बताया पायलट प्रोजेक्ट के रूप में बायो सीएनजी प्लांट लगाया जाएगा। प्लांट लगाने पर निगम का कोई खर्चा नहीं होगा। डूंडाहेडा स्थित प्लांट की 70 मिलियन लीटर प्रतिदिन क्षमता का है। इसके माध्यम से सीवेज वॉटर ट्रीटमेंट किया जा रहा है। उपकरणों का इस्तेमाल कर बायो सीएनजी गैस बनाई जाएगी। उन्होंने बताया प्लांट लगाने के लिए संबंधित कंपनी को 15 साल के लिए जमीन लीज पर दी है।
प्लांट एक साल में बनकर तैयार होगा
महापौर सुनीता दयाल ने बताया साहिबाबाद साइट-चार में सीवर का पानी शोधित कर फैक्ट्रियों को जा रहा है। इसके लिए प्लांट लगाया है। अब सीवर के पानी और मलबे से बायो सीएनजी प्लांट लगाया जा रहा है। इससे शहर के लोगों को लाभ मिलेगा। उन्होंने बताया यह प्लांट एक साल में बनकर तैयार हो जाएगा।
नगर आयुक्त, विक्रंमादित्य सिंह मलिक ने बताया, जहरीली गैस को इक्ट्ठा कर पर्यावरण के अनुकूल बनाया जाएगा।सीवर के पानी और मलबे से बायो सीएनजी गैस बनने से वायु प्रदूषण में कमी आएगी। सीएनजी गैस का इस्तेमाल निगम के वाहनों में भी किया जाएगा। पायलट प्रोजेक्ट सफल होने के बाद अन्य स्थानों पर भी इस तरह के प्लांट लगाने की योजना है।





