जेन-जी ने बताया विश्वगुरु का असली मतलब; प्रधान के इस्तीफे पर बोलीं वांगचुक की पत्नी- शायद अब समय आ गया है…
अपनी पोस्ट में गीतांजलि आंग्मो ने लिखा, ‘दुनिया भर के अपने हमउम्र युवाओं के उलट, उन्होंने दिखाया है कि आप अपने ही देश को जलाए बिना अन्याय के खिलाफ मजबूती से खड़े हो सकते हैं।'’

दिल्ली के जंतर-मंतर पर बीते 36 दिनों से जारी कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन के बाद केंद्रीय शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार दोपहर को अपना इस्तीफा दे दिया। जिसके बाद इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने इसका पूरा श्रेय भारत की जेन-जी पीढ़ी को दिया और कहा कि भारत के विश्वगुरु होने का मतलब हमारी जेन-जी पीढ़ी ने समझाया है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर प्रतिक्रिया देते हुए गीतांजलि ने लिखा, 'भारत के 'विश्वगुरु' होने का क्या मतलब है, अगर किसी ने यह समझाया है तो वह हमारी 'जेन-जी' (Gen Z) पीढ़ी ही है। उन्होंने सनातन धर्म को बगैर बड़े-बड़े उपदेशों के अपने जीवन में अपनाया है। बगैर नफरत के साहस, बगैर हिंसा के मजबूती और बगैर अंध भक्ति के देश भक्ति।'
इसके आगे उन्होंने लिखा, 'दुनिया भर के अपने हमउम्र युवाओं के उलट, उन्होंने दिखाया है कि आप अपने ही देश को जलाए बिना अन्याय के खिलाफ मजबूती से खड़े हो सकते हैं।' अपनी पोस्ट के अंत में गीतांजलि ने लिखा, 'शायद अब समय आ गया है कि हिंदू राष्ट्रवादी पार्टी इन युवा भारतीयों से हिंदू धर्म, राष्ट्रवाद और 'विश्वगुरु' होने के असली मतलब के बारे में दो-चार बातें सीखे।'
बता दें कि बीते 36 दिनों से जंतर-मंतर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' का आंदोलन चल रहा था, और पार्टी द्वारा नीट परीक्षा में हुई गड़बड़ियों को लेकर शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांग रही थी, और उनकी इसी मांग के समर्थन में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भूख हड़ताल पर भी बैठे थे। 26 दिन तक चले अनशन के बाद उन्होंने शुक्रवार देर रात अपना अनशन खत्म कर दिया था।


