'जैसे पानी को गीला कहना', संविधान में 'सेक्युलर' शब्द पर क्या बोलीं सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि
पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि ने संविधान में भारत को 'सेक्युलर' बताने पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि यह वैसा ही है, जैसे यह कहना कि पानी गीला होता है। गीतांजलि ने कहा कि 'सेक्युलर' शब्द पश्चिम से आया है और यह यूरोप में चर्च और राज्य के बीच हुए टकराव से पैदा हुआ है।

हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स लद्दाख की फाउंडर और सीईओ गीतांजलि आंग्मो ने संविधान में भारत को 'सेक्युलर' बताने पर अपने विचार रखे। एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की पत्नी ने शुक्रवार को कहा कि भारत 1976 से पहले भी 'सेक्युलर' (धर्मनिरपेक्ष) था। संविधान में 'सेक्युलर' शब्द का इस्तेमाल करना वैसा ही है जैसे पानी को गीला कहना। यानी ऐसी बात कहना जो पहले से ही साफ है। गीतांजलि ने अपनी बात साबित करने के लिए संविधान के अनुच्छेदों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 'सेक्युलर' (धर्मनिरपेक्ष) शब्द पश्चिम से आया है और यह यूरोप में चर्च और राज्य के बीच हुए टकराव से पैदा हुआ है।
भारत ने 'वसुधैव कुटुंबकम' की बात की थी
गीतांजलि ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि 'सेक्युलर' शब्द पश्चिम से आया है और यह यूरोप में चर्च और राज्य के बीच हुए टकराव से पैदा हुआ है। यह धार्मिक विविधता के प्रति भारत के ऐतिहासिक नजरिए को पूरी तरह नहीं दर्शाता। भारत का नजरिया 'सर्व धर्म समभाव' या सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान जैसे विचारों से बेहतर ढंग से समझा जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावना में 'सेक्युलर' (धर्मनिरपेक्ष) शब्द जोड़ना 'टॉटोलॉजी' (एक ही बात को अलग शब्दों में दोहराना) है। उन्होंने लिखा कि आधुनिक धर्मनिरपेक्षता से बहुत पहले ही भारत ने 'वसुधैव कुटुंबकम' की बात की थी। यह स्वभाव से ही सबको साथ लेकर चलने वाला है। इसने हर रास्ते के सम्मान को बनाए रखते हुए कई तरह के नजरियों और दार्शनिक परंपराओं को अपनाया और आगे बढ़ाया है।
पीएम आवास के बाहर प्रदर्शन पर सवाल
कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शन के दौरान जब दिल्ली पुलिस ने संसद मार्च के आह्वान से पहले सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से उठा लिया तो उनकी पत्नी गीतांजलि आंग्मो विरोध प्रदर्शनों में सक्रिय रहीं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास के पास कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन पर भी सवाल उठाए और कहा कि यह पेपर लीक के खिलाफ चल रहे छात्रों के आंदोलन के लिए वास्तविक समर्थन नहीं दिखाता है।
आंग्मो ने कहा कि राजनीतिक नेताओं को प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन करने के बजाय दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध कर रहे छात्रों के साथ शामिल होना चाहिए था। उन्होंने यह भी कहा कि वांगचुक की सार्वजनिक छवि का इस्तेमाल राजनीतिक उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोग सच्चे और प्रतीकात्मक कार्यों के बीच अंतर कर सकते हैं।
वांगचुक ने रेलवे की तारीफ की
वहीं, अपने घर लद्दाख लौटते समय सोनम वांगचुक ने भारतीय रेलवे की तारीफ की। 23 जुलाई को अपना अनशन खत्म करने के बाद उनका गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में इलाज चल रहा था। उन्होंने वंदे भारत ट्रेन से जम्मू-कश्मीर तक का सफर किया और उसके अगले दिन लद्दाख के लिए रवाना हुए। वांगचुक ने गुरुवार सुबह एक्स पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें वे भारतीय रेलवे की तारीफ करते हुए और भारत सरकार से अपने वादों पर कायम रहने की अपील करते हुए सुने गए।
शिक्षा प्रणाली में भी सुधार की उम्मीद
वीडियो में वांगचुक ने कहा कि रेल से यात्रा करना उनका पसंदीदा जरिया है। उन्होंने दिल्ली से जम्मू-कश्मीर के बीच चलने वाली वंदे भारत ट्रेन सेवा की तारीफ की। वांगचुक ने वीडियो में कहा कि मैं चिनाब ब्रिज भी देखना चाहता था और यह बहुत ही शानदार अनुभव रहा। मुझे भारतीय रेलवे पर बहुत गर्व है। वांगचुक ने सरकार से सीधे अपील की कि वह छात्रों से किए गए उस वादे पर कायम रहे, जिसके तहत देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने वाले छात्रों के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी। वांगचुक ने वीडियो में कहा कि मुझे खुशी है कि संसद में परीक्षाओं में सुधार के लिए बिल पेश किया गया है। मुझे उम्मीद है कि यह सुधार सिर्फ परीक्षाओं में ही नहीं, बल्कि पूरी शिक्षा प्रणाली में भी किया जाएगा।


