अब सारे 'दिमागी नक्सल' जुटानी चाहती है CJP, अभिजीत दीपके के 'कॉकरोच फॉर्मूले' का इस्तेमाल
कॉकरोच जनता पार्टी की नेता रत्ना सिंह ने उसी सवाल का इस्तेमाल 'दिमागी नक्सल' पर किया है, जिसके जरिए अभिजीत दीपके ने करोड़ों युवाओं को अपने साथ जोड़ लिया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान के बाद 'दिमागी नक्सल' पर छिड़े घमासान के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने उसी तरह की अपील कर दी है, जिसके जरिए अभिजीत दीपके ने देशभर से करोड़ों फॉलोअर्स को सोशल मीडिया पर जोड़कर सबको चौंका दिया। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत के एक बयान के बाद जिस तरह दीपके ने देशभर के 'कॉकरोच' से एकजुट करने की अपील की थी, उसी तरह अब उनकी पार्टी ने सभी 'दिमागी नक्सल' को लेकर यह बात कही है।
सीजेपी की नेता और पार्टी के लीगल मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने दीपके वाली पंक्ति का इस्तेमाल दिमागी नक्सल को लेकर किया। उन्होंने लिखा, 'क्या होगा यदि सारे दिमागी नक्सल एक साथ आ जाएं?' असल में यही वह पंक्ति है जिसने अभिजीत दीपके की दिशा बदलने के साथ देश में एक ऐसे आंदोलन की नींव रख दी,जिसकी वजह से पहली बार मोदी सरकार के एक मंत्री को दबाव में आकर इस्तीफा देना पड़ा। चीफ जस्टिस की ओर से कथित तौर पर एक टिप्पणी में 'कॉकरोच' शब्द का इस्तेमाल किया गया तो दीपके ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर पूछा, 'क्या होगा यदि सारे कॉकरोच एक साथ आ जाएं?' उनको इस सवाल पर जो प्रतिक्रिया मिली उसके बाद ही 'कॉकरोच जनता पार्टी' नाम का वह हैंडल बनाया जिसने चार-पांच दिनों में ही सोशल मीडिया फॉलोअर्स के मामले में कांग्रेस और भाजपा को भी पीछे छोड़ दिया।
रत्ना सिंह के सवाल पर लोगों का क्या जवाब
15 अगस्त को पीएम मोदी के बयान के बाद रत्ना सिंह ने सोशल मीडिया पर यह सवाल किया तो हजारों लोगों ने इस पर प्रतिक्रिया दी। अंकुर नाम के एक यूजर ने लिखा, 'आइडिया ही यही है कि सारे दिमागी नक्सल एक साथ बाहर आ जाएं और तब उनपर एक ही बार में राष्ट्रव्यापी कार्रवाई हो।' मनीष शर्मा नाम के एक अन्य यूजर ने लिखा, 'वही जो जंगल के नक्सलों के साथ होता है। वास्तव में युद्ध का मैदान बदलने से परिणाम नहीं बदलता।' वहीं, कुछ लोगों ने कॉमेंट करते हुए पूछा कि क्या होगा यदि सभी भाजपा समर्थक, राष्ट्रवादी या संघी एकजुट हो जाएं? जिन बहुत कम लोगों ने इस सवाल पर सीजेपी का समर्थन किया है, उनमें से एक ने लिखा, 'दिमागी नक्सल और गर्व। यदि सवाल पूछना हमें दिमागी नक्सल बनाता है, तो मेरी भी इसमें गिनती कर लो। मैं रत्ना सिंह के साथ हूं। कम से कम हमारे पास सोचने के लिए दिमाग है। आगे क्या होगा?'
पीएम मोदी ने 'दिमागी नक्सल' पर क्या कहा?
देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जहां सशस्त्र नक्सलवाद का खतरा अब समाप्ति की ओर है, वहीं 'दिमागी नक्सल' सोच रखने वाले कुछ लोग ऐसे हैं, जो हिंसा और अशांति फैलाने के मौके तलाश रहे हैं और देश को गलत दिशा में ले जाना चाहते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें अलग-थलग करने की जरूरत है और युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ना चाहिए।
सीजेपी ने पीएम के बयान को प्रदर्शन से जोड़ा
सीजेपी ने पीएम मोदी के बयान को युवाओं के प्रदर्शन से जोड़ने की कोशिश की। सीजेपी के सह संयोजक सौरभ दास ने कहा कि केवल सरकार पर सवाल उठाने के कारण पढे़ लिखे युवाओं को 'नक्सली' करार नहीं दिया जा सकता। दास ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, 'प्रधानमंत्री जी, 'दिमागी नक्सल' या ऐसी कोई भी बात काम नहीं आएगी। आप पढ़े-लिखे युवाओं को नक्सली वगैरह कैसे कह सकते हैं? सिर्फ इसलिए कि वे आपकी सरकार से सवाल पूछते हैं? यह सरासर अहंकार है। उनकी समस्याओं को हल करने में पूरी तरह नाकामी है।'


