
JNU में लगे 'मोदी-शाह की कब्र खुदेगी’ के नारे, छात्रों के नाम उजागर; प्रशासन बोला- सोच समझकर किया
JNU कैंपस में छात्रों के एक समूह द्वारा मोदी-शाह की कब्र खुदेगी जैसे विवादित और भड़काऊ नारे लगाने का मामला सामने आया है। इस पर कैंपस की तरफ से दिल्ली पुलिस के चिट्ठी लिखी गई है। इसमें नारेबाजी में शामिल छात्रों के खिलाफ एक्शन लेने की बात करते हुए FIR करने की मांग की गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने 2020 दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को बेल देने से इंकार कर दिया है। इसके बाद JNU कैंपस में छात्रों के एक समूह द्वारा मोदी-शाह की कब्र खुदेगी जैसे विवादित और भड़काऊ नारे लगाए गए। मामला सामने आया तो कैंपस की तरफ से दिल्ली पुलिस को चिट्ठी लिखी गई, जिसमें नारेबाजी में शामिल छात्रों के खिलाफ एक्शन लेने की बात करते हुए FIR की मांग की गई है।
हिंसा की बरसी मनाने को जुटे थे छात्र
कैंपस की तरफ से चिट्ठी में बताया गया है कि 5 जनवरी को रात करीब 10 बजे JNUSU से जुड़े छात्रों द्वारा कैंपस के साबरमती हॉस्टल के बाहर एक कार्यक्रम मनाया गया था। ये कार्यक्रम 5 जनवरी 2020 को JNU में हुई हिंसा की छठी बरसी मनाने की याद में था। इसका टाइटल था- “ए नाइट ऑफ़ रेजिस्टेंस विद गुरिल्ला ढाबा।”
देखते ही देखते छात्रों की बदल गई टोन
कैंपस की तरफ से बताया गया कि शुरूआत में लगा कि ये केवल सालगिरह को मनाने की याद में है, लेकिन फिर वहाँ एकट्ठा हुए छात्रों का नेचर और टोन बदल गया। हालांकि वहां बहुत ज्यादा संख्या में छात्र मौजूद नहीं थे। उनकी संख्या करीब 30-35 बताई जा रही है।
नारेबाजी में शामिल छात्रों के सामने आए नाम
इनमें कुछ छात्रों की पहचान हो गई है, जिनके नाम कैंपस की तरफ से दिल्ली पुलिस को लिखी गई चिट्ठी में बताए गए हैं- अदिति मिश्रा, गोपिका बाबू, सुनील यादव, दानिश अली, साद आज़मी, महबूब इलाही, कनिष्क, पाकीज़ा खान, शुभम और दूसरे शामिल थे।

मोदी, शाह, अडानी, अंबानी के खिलाफ नारेबाजी
चिट्ठी के मुताबिक, सालगिरह प्रोग्राम में उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत न मिलने का जिक्र शुरू हुआ, जिसके बाद कार्यक्रम का टोन एकदम से बदल गया। कुछ छात्रों ने आपत्तिजनक, भड़काऊ और विवादित नारे लगाए गए। इसमें कोर्ट की अवमानना भी शामिल रही।
सोशल मीडिया पर शेयर हो रहे वीडियो में दिखाई-सुनाई देता है- अंबानी राज की कब्र खुदेगी, जेएनयू की धरती पर। अडानी राज की कब्र खुदेगी, जेएनयू की धरती पर। मोदी-शाह की कब्र खुदेगी, जेएनयू की धरती पर।

JNU कोड ऑफ कंडक्ट का उल्लंघन
कैंपस ने ऐसे भड़काऊ नारेबाजी को डेमोक्रेटिक असहमति के बिल्कुल खिलाफ बताया है। कैंपस की तरफ से जारी स्टेटमेंट में इसे JNU कोड ऑफ कंडक्ट का उल्लंघन बताया गया है। आगे कहा गया है कि इससे पब्लिक ऑर्डर, कैंपस में शांति और यूनिवर्सिटी के सेफ्टी और सिक्योरिटी के माहौल को गंभीर रूप से बिगाड़ने की संभावना है।
सोच समझकर किया गया गलत काम
कैंपस की तरफ से स्पष्ट किया गया- लगाए गए नारे साफ सुनाई दे रहे थे कि जानबूझकर लगाए गए हैं। ये नारे बार-बार दोहराए गए थे, जिससे पता चलता है कि यह जानबूझकर और सोच-समझकर किया गया गलत काम था, न कि कोई अचानक या अनजाने में किया गया इशारा। JNU की तरफ से दिल्ली पुलिस से निवेदन करते हुए कहा गया है कि इस घटना में BNS की संबंधित धाराओं के तहत FIR दर्ज करें।

लेखक के बारे में
Ratan Guptaरतन गुप्ता एक डिजिटल हिंदी जर्नलिस्ट/ कॉन्टेंट प्रोड्यूसर हैं। वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान की स्टेट न्यूज टीम के साथ काम कर रहे हैं। वह क्राइम, राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर न्यूज आर्टिकल और एक्सप्लेनर स्टोरीज लिखते हैं।
रतन गुप्ता वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर स्टेट न्यूज टीम में काम करते हैं। इस टीम में हिंदी पट्टी के 8 राज्यों दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गुजरात से जुड़ी खबरों की कवरेज करते हैं। उनका लेखन खास तौर से क्राइम, राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित रहता है।
लाइव हिंदुस्तान में बीते 2 साल से काम करते हुए रतन ने ब्रेकिंग न्यूज, राजनीतिक घटनाक्रम और कानून-व्यवस्था से जुड़ी खबरों पर लगातार लेखन किया है। इसके साथ ही वह एक्सप्लेनर स्टोरीज लिखने में भी विशेष रुचि रखते हैं, जहां जटिल मुद्दों को सरल और तथ्यपरक भाषा में पाठकों के सामने रखते हैं।
रतन गुप्ता ने बायोलॉजी में ग्रेजुएशन किया है, जिसके बाद उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की है। साइंस बैकग्राउंड होने के कारण उनकी न्यूज और एनालिसिस स्टोरी में साइंटिफिक टेंपरामेंट, लॉजिकल अप्रोच और फैक्ट-बेस्ड सोच साफ दिखाई देती है। वह किसी भी मुद्दे पर रिपोर्टिंग करते समय दोनों पक्षों की बात, मौजूद तथ्यों और आधिकारिक स्रोतों को प्राथमिकता देते हैं, ताकि यूजर तक संतुलित और भरोसेमंद जानकारी पहुंचे।
इसके साथ ही आईआईएमसी की एकेडमिक पढ़ाई ने उन्हें रिपोर्टिंग, न्यूज प्रोडक्शन, मीडिया एथिक्स और पब्लिक अफेयर्स की गहरी समझ दी है। इसका सीधा असर उनके लेखन की विश्वसनीयता और संतुलन में दिखाई देता है।
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